जागरण संवाददाता, गाजीपुर : कोरोना महामारी के दौरान बड़े शहरों में अचानक से आक्सीजन सिलेंडरों की मांग बढ़ गई है। गंभीर रूप से बीमार और सांस लेने में तकलीफ होने पर कोरोना रोगियों को आक्सीजन की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन अपने जिला अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जिला अस्पताल में ही कोविड लेवल-2 वार्ड बनाया गया है, जहां कोरोना के गंभीर मरीजों को रखा जा रहा है। हालांकि यहां पर सप्ताह में एक या दो मरीजों को ही आक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता पड़ती है।

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एल-2 वार्ड में रहते हैं 20 आक्सीजन सिलेंडर

- जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डा. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यहां बनाए गए एल-2 वार्ड में फिलहाल छह वेंटिलेटर काम कर रहे हैं। हालांकि कोरोना मरीजों को कभी-कभी ही उसकी आवश्यकता पड़ी है। सप्ताह में एक या दो मरीजों को आक्सीजन सिलेंडर की जरुरत पड़ती है। नियमानुसार यहां आक्सीजन सिलेंडर का 48 घंटे का पर्याप्त स्टाक रखा रहता है। फिलहाल 14 छोटे और छह बड़े आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है। इसमें से एक भी खाली होता है तो उसे तत्काल मंगा कर स्टाक पूरा कर लिया जाता है। अगर पूरे जिला अस्पताल की बात करें तो यहां पर 40 से अधिक आक्सीजन सिलेंडर हमेशा स्टाक में रखा जाता है। अगस्त में 45 छोटे और एक बड़े आक्सीजन सिलेंडर की खपत हुई। वहीं सितंबर में अब तक चार बड़े आक्सीजन सिलेंडर उपयोग किया गया है। हालांकि इसमें जिला अस्पताल के सभी मरीज शामिल हैं।

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: जिला महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डा. तारकेश्वर ने बताया कि हमारे यहां कोविड वार्ड नहीं है। ऐसे में यहां पर पहले जैसी ही स्थिति है। प्रसूताओं के लिए आक्सीजन सिलेंडर रखा जाता है। इसका अभी पर्याप्ट स्टाक है। जब भी जरुरत होती है, मंगवा लिया जाता है। यहां पर आक्सीजन सिलेंडर की कोई किल्लत नहीं है।

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: सिंह लाइफ केयर हस्पिटल के डायरेक्टर डा. राजेश सिंह ने बताया कि हमारे यहां कोरोना के रोगियों का उपचार नहीं होता है। सामान्य रोगियों के लिए ही आक्सीजन सिलेंडर की जरुरत पड़ती है। इसकी खपत पहले जैसी ही है। कोई किल्लत नहीं है, हालांकि दाम कुछ ऊपर-नीचे होता रहता है।

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