मुहम्मदाबाद (गाजीपुर) : तहसील क्षेत्र के राजापुर ग्राम के रायपुर मौजे में विराजमान हैं त्रिशूलधारी बाबा भोलेनाथ के एक स्वरूप गोरिल बाबा। परंपरानुसार श्रावण शुक्ल सप्तमी या उसके बाद पड़ने वाले मंगलवार को इस धाम पर हर वर्ष मेला लगता है। भगवान भोले नाथ के त्रिशूल सदृश श्री गोरिल बाबा लोगों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। मेला में गाजीपुर के अलावा बलिया, वाराणसी, मऊ के पहलवान कुश्ती कला का प्रदर्शन करते हैं। कथाओं के अनुसार 18वीं शताब्दी में राजापुर के लोगों के पूर्वज श्रीकांत राय आजमगढ़ जनपद के रैनी अमारी ग्राम से चलकर उक्त स्थान पर पहुंचे। जहां पर अब के समय में शिव के अवतार श्री गोरिल बाबा का धाम स्थित है। वहां पर उन्होंने आश्चर्यजनक घटना देखी उन्होने देखा की बिना हलवाहे के हल अपने आप खेत में चल रहा था। तभी त्रिशुलधारी बाबा हाथी पर चढ़ कर सामने प्रकट हुए और उनकी शंका मिटाई। कहा की डरो मत बेटा। मैं गोरिल डीह हूं। बेटा तुम अपनी व्यथा सुनाओ। तब श्रीकांत राय ने कहा कि मैं शरणागत हूं। मुझे आपकी छत्रछाया चाहिए। भक्त वत्सल श्री गोरिल बाबा ने कहा की तुम सपरिवार यहीं पर आकर बस जाओ। मैं सदैव तुम सबकी रक्षा करूंगा। उस समय इस इलाके में चेर एवं खरवार जाति का बहुत ही आतंक था। गोरिल बाबा की कृपा से उनकी झोपड़ियों पर ईंट एवं पत्थर गिरने लगे। बाबा की कृपा से तीन दिन के अंदर ही उनका सर्वनाश हो गया। जो बचे वे भाग कर अन्यत्र चले गये। आज भी राजापुर उसी ईंट व पत्थर से बन ऊंचे टीले पर ही आबाद है। उसी समय श्रीकांत राय ने सपरिवार बस कर राजापुर को आबाद किया। एक समय कुछ चोर बाबा गोरिल नाथ की मूर्ति उखाड़ कर ले जाने का प्रयास किये तो पास में स्थित एक कुंआ मे गिर गए। उनके आंखों की रोशनी गायब हो गयी। जब बाबा की प्रार्थना किए तो उनकी आंखों की रोशनी वापस आई और जीवन दान मिला। अठारहवीं शताब्दी से लेकर आज तक बावनो गांव दोनवार वंशीय भूमिहार एवं उनके रिश्तेदार सगे संबंधी श्री गोरिल बाबा को अपना इष्टदेव मानते हैं। प्रत्येक मंगलवार को धाम पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। बाबा सबकी मनोकामना पूर्ण करते है। मेला आयोजक समिति के अध्यक्ष नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष 16 अगस्त को मेला का आयोजन किया गया है।