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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उबैदुर्रहमान गाजीपुर रसखान से सम्मानित

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Published: Mon, 26 Aug 2013 08:12 PM (IST)Updated: Mon, 26 Aug 2013 08:13 PM (IST)

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गाजीपुर : साहित्य संगम संस्था की ओर से रविवार को नगर के साहित्यकार उबैदुर्रमान सिद्दीकी को गाजीपुर रसखान सम्मान प्रदान किया गया। रविवार को गोराबाजार में 'उबैदुर्रहमान सिद्दीकी, एक शोधकर्ता, एक साहित्यकार' विषयक गोष्ठी आयोजित की गई। इस मौके पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के डा. तेज बख्शी ने कहा कि अमर हैं वह लोग जो इतिहास के पन्नों से ज्यादा हमारे दिलों में रहते हैं।

उन्होंने कहा कि वक्त के पटल पर लिखे शब्द मिट सकते हैं लेकिन दिलों में लिख्री गई कहानियां हमेशा कायम रहती हैं। उन्हीं में एक उबैदुर्रहमान सिद्दीकी हैं जिन्होंने कम आयु में जो उपलब्धियां हासिल की हैं वह प्रशंसनीय है। डा. जितेंद्रनाथ शर्मा ने कहा कि गाजीपुर के फलक पर इतिहास, साहित्य के साथ सूफी संत साहित्य के क्षेत्र में मौलिक शोधकर्ताओं की श्रृंखला में उबैदुर्रहमान का नाम नाम उभर कर आया है। उन्होंने अपनी कृतियों का प्रणयन कर गाजीपुर की ऐतिहासिकता, आध्यामिकता और सांस्कृतिक शुचिता को प्रमाणिकता के साथ प्रतिष्ठापित करने की कोशिश की है। गोष्ठी में शेख जैनुल आब्दीन, हसनैन सिद्दीकी, ऐश गाजीपुरी, रईस शहीदी, अजीज गाजीपुरी, हंटर गाजीपुरी, नजर गाजीपुरी, तारिक जमाल, रुपेश सिंह, सिंहासन सिंह यादव, हरिओम गाजीपुरी, राशिद रिजवी ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन गिरजा सिंह ने किया।

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