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जीवनसाथी का मिला साथ...चिकित्सकों ने किया हाई रिस्क किडनी ट्रांसप्लांट

Published: Sat, 19 Sep 2026 07:41 PM (IST)

इंदिरापुरम के यशोदा मेडिसिटी में एंटी फास्फोलिपिड एंटी बाडी सिंड्रोम (एपीएलए) से ग्रसित 28 वर्षीय महिला का हाई रिस्क किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया।

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HighLights

  1. यशोदा मेडिसिटी में हाई रिस्क किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

  2. एपीएलए से ग्रसित महिला को पति ने अपनी किडनी दान की।

  3. एक महीने की निगरानी के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी मिली।

जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। इंदिरापुरम स्थित यशोदा मेडिसिटी में एंटी फास्फोलिपिड एंटी बाडी सिंड्रोम (एपीएलए) से ग्रसित कश्मीर की 28 वर्षीय महिला में हाई रिस्क वाले किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक किया गया।

सर्जरी और उपचार में जटिलताओं पर शनिवार को अस्पताल में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान चिकित्सकों ने जानकारी दी। महिला के पति ने अपनी किडनी देकर जीवनसाथी का साथ दिया।

चिकित्सकों ने ट्रांसप्लांट के बाद एक महीने की निगरानी में रखकर महिला के पूरी तरह से स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दी।

सीनियर डायरेक्टर डॉ. वैभव सक्सेना ने बताया कि एपीएलए एक गंभीर आटोइम्यून डिसआर्डर है, जिसमें जानलेवा खून के थक्के बनने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

इन बातों का बना हुआ था खतरा

मरीज मोरीफात रशीद में पिछले सेंसिटाइजेशन के कारण डोनर-स्पेसिफिक एंटी बाडीज का भी खतरा था। 18 अगस्त 2026 को किए गए ट्रांसप्लांट में महिला के पति द्वारा दान की गई किडनी का इस्तेमाल किया गया।

ट्रांसप्लांट से पहले खून के थक्के बनने के खतरे और संभावित इम्यून से जुड़ी दिक्कतों को देखते हुए टीम ने पूरी तैयारी और सावधानी के साथ इलाज की योजना बनाई।

मोरीफात रशीद को डेढ़ साल पहले बीमारी का पता चला। खून के थक्के जमने की ज्यादा संभावना के कारण उनका इलाज वारफेरिन से किया जा रहा था। उनमें तीन बार गर्भपात होने और कई बार ब्लड ट्रांस फ्यूजन की मेडिकल हिस्ट्री थी।

एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. कुलदीप अग्रवाल, डॉ. प्रजीत मजूमदार और नेफ्रोलाजी और रीनल ट्रांसप्लांट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. इंद्रजीत जी., मोमिन शामिल थे।

ट्रांसप्लांट से पहले तीन बार हुए सेशन

ट्रांसप्लांट से पहले थेरेपी के साथ प्लाज्माफेरेसिस का तीन बार सेशन किया गया। एपीएलए से जुड़े थ्रोम्बोसिस यानी रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया के खतरे को मैनेज करने के लिए ट्रांसप्लांट से पांच दिन पहले उनकी रेगुलर वारफेरिन दवा बंद कर दी गई और एंटीकोएगुलेशन को हेपरिन से मैनेज किया गया।

चिकित्सकों ने बताया कि यह काफी चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट था। मोरीफात रशीद ने बताया कि इतने खतरों के बावजूद किडनी ट्रांसप्लांट करवाना मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी। मेरे पति का डोनर के तौर पर आगे आना मेरे लिए बहुत बड़ी हिम्मत और उम्मीद की बात थी।