जागरण संवाददाता, वैशाली : काली मंदिर पार्क में आयोजित होने वाली वैशाली कल्चरल एसोसिएशन दुर्गा पूजा इस बार पर्यावरण बचाने का संदेश देगी। पूजा पंडाल में 25 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। दुर्गा पूजा का पंडाल नगालैंड के बांस से बनाया जा रहा है। यह पूरी तरह ईको फ्रेंडली रहेगा।

वैशाली कल्चरल एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके झा ने बताया है कि मूर्ति पूरी तरह से पर्यावरण को बचाने वाली रहेगी। इसमें बांस, घास-फूस, जलकुंभी और फूलों को इस्तेमाल किया जाएगा। खासतौर पर इसके लिए चिकनी मिट्टी भी कोलकाता, लोनी और दिल्ली में यमुना से मंगाई गई है। इसे बनाने वाले कलाकार सागर पाल ने बताया है कि बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टर ऑफ पेरिस और प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। वहीं महासचिव संदीप ने बताया है कि इसमें जूट, बांस और कपड़े का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही मूर्ति विसर्जन के लिए एक रेडीमेड कुंड बनाया जाएगा, जिसका मकसद जल प्रदूषण को रोकना और जल संरक्षण करना रहेगा। मिट्टी की बनी मूर्ति होने के कारण यह पूरी तरह से घुल जाएगी।

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सर्व समाज को करते हैं शामिल : 26वां दुर्गा पूजन का आयोजन चार से आठ अक्टूबर तक चलेगा। काली मंदिर की पूजा खास होती है। वैशाली सेक्टर चार काली मंदिर में अलग-अलग भगवानों के मंदिर बने हुए हैं। यहां सभी समाज के लोगों को पूजन में शामिल किया जाता है। इसके साथ ही यहां पर बंगाली परिवारों के सभी संस्कार भी कराए जाते हैं। दुर्गा पूजा में लगभग 22 सौ से अधिक बंगाली परिवार जुड़े हुए हैं। यह वैशाली की बड़ी और पुरानी दुर्गा पूजा समितियों में से एक है। इसके साथ ही इसमें वैशाली, शालीमार गार्डन, साहिबाबाद के परिवारों को भी जोड़ा जाता है।

Posted By: Jagran

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