जागरण संवाददाता, गाजियाबाद :

नंदग्राम स्थित कृष्णाकुंज के सीवर हादसे में पांच मजदूरों की मौत के मामले में जांच अधिकारी ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी। इसमें लिखा गया है कि कार्यदायी संस्था ईएमएस इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड व जल निगम के अधिकारियों की लापरवाही से मजदूरों की मौत हुई है। हालांकि, पुलिस ने विवेचना में धाराओं को हल्का कर दिया है।

मामले की जांच कर रहे क्षेत्राधिकारी प्रथम धर्मेंद्र चौहान ने बताया कि चार्जशीट में लिखा गया है मजदूरों की मौत के पीछे किसी की कोई मंशा नहीं थी। मामले कार्यदायी संस्था व जल निगम के अधिकारियों ने लापरवाही बरती। मृतकों में एक सुपरवाइजर भी था। बिना किसी उपकरण को मजदूरों को मौत के मुंह में धकेल दिया गया। उन्होंने बताया कि जब मजदूर काम कर रहे थे, उस वहां एक दुकानदार ने उन्हें मैनहोल में उतरने से रोका था। मगर मजदूरों ने कहा था कि उन्हें नीचे नहीं उतरना है, केवल मैनहोल में पाइप लगाने के लिए छेद में सीमेंट लगाकर बाहर निकल आना है। पहला मजदूर मैनहोल की सीढि़यों से फिसलकर नीचे गिर गया। इसके बाद उसे निकालने के लिए अन्य मजदूर भी बारी-बारी से नीचे उतर गए। दम घुटने से उनकी मौत हो गई। क्षेत्राधिकारी ने बताया कि यह मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धारा 304 में दर्ज हुआ था। घटनाक्रम को देखते हुए कोर्ट में इस धारा पर आपत्ति जताई थी। लिहाजा सबूतों और गवाहों के मद्देनजर 304 धारा से 304 ए में बदला गया है।

बता दें कि 22 अगस्त की दोपहर कृष्णा कुंज में निर्माणाधीन सीवर लाइन में उतरे पांच मजदूरों की मौत हो गई थी। शासन की घोषणा के अनुसार मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। तीन अलग-अलग शिकायतों पर सिहानी गेट थाने में तीन नामजद समेत अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसकी जांच सीओ सिटी फ‌र्स्ट धर्मेंद्र चौहान को सौंपी गई थी।

Posted By: Jagran

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