हसीन शाह, साहिबाबाद : वसुंधरा सेक्टर-सात में आविप (आवास विकास परिषद) की 50 एकड़ भूमि पर दुकान चला रहे दुकानदारों व अन्य कब्जाधारियों से हर माह 30 लाख रुपये की अवैध वसूली हो रही थी। यहां पर बड़ी संख्या में डेयरी और नर्सरी चल रही थीं। जब आविप की टीम अवैध निर्माण को ध्वस्त करने पहुंची तो वसूली करने वाले फरार हो गए और उन्होंने फोन बंद कर लिये। दैनिक जागरण में कब्जे की खबर प्रकाशित होने के बाद आविप ने मंगलवार अरबों रुपये की भूमि को खाली कराया था। भूमि पर बना दी गई थीं आलीशान दुकानें : वसुंधरा के पाश इलाके में फर्नीचर सहित अन्य सामान की आलीशान दुकानें बना दी गई थीं। प्राइम लोकेशन होने की वजह से दुकानदार भी हर माह लाखों रुपये कमा रहे थे। दो दर्जन से ज्यादा नर्सरी और डेयरी संचालित हो रही थीं। प्रत्येक डेयरी में 50 से 100 भैंसें थीं। गोबर खुले में फेंका जा रहा था। विद्युत विभाग से मिलीभगत कर दुकानों में बिना मीटर के बिजली आपूर्ति की जा रही थी। वसूली करने वालों ने किये फोन बंद :

वसूली करने वाले लोग आविप की भूमि को अपना बताकर किराया लेते थे। लोकल के व्यक्ति को भूमि किराये पर नहीं देते थे। दुकानदार एग्रीमेंट कराने के लिए कहते तो आरोपित टालमटोल कर देते थे। जब बुलडोजर से अवैध निर्माण ध्वस्त किया गया तो वसूली करने वालों ने फोन बंद कर लिया। आविप द्वारा नोटिस जारी होने के बाद आरोपित फरार हो गए थे। नोटिस के बाद ही दुकानदारों को पता चला यह किराया लेने वालों की यह भूमि नहीं थी। लोगों ने बताया कि जिन लोगों ने आविप को अपनी भूमि बेच दी थी, वहीं लोग वसूली कर करने आते थे। वसूली करने वालों पर एफआइआर दर्ज होनी चाहिए। हम छोटी सी दुकान का आठ हजार रुपये प्रति माह किराया देते थे। नोटिस मिला तो पता चला कि यह भूमि किराया लेने वाले की नहीं है। हमारे साथ धोखाधड़ी हुई है।

- राहुल कुमार, दुकानदार हमारा लाखों रुपये माल खराब हो गया है। हम हर माह दस हजार रुपये किराया देते थे। फर्नीचर दुकानदार तो 20 से 40 हजार रुपये प्रति माह किराया दे रहे थे।

- प्रमोद कुमार, दुकानदार अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। अगर परिषद के ही कुछ लोग इसमें शामिल हैं तो उनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - अजय चौहान, कमिश्नर उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद

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