जागरण संवाददाता, साहिबाबाद : खतरनाक स्थिति में पहुंचा प्रदूषण सांस के रोगियों पर भारी पड़ रहा है। शनिवार सुबह दस बजे जिले में हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बहुत बढ़ गई। सुबह दस बजे 485 और शाम पांच बजे 471 एक्यूआइ दर्ज किया गया। कौशांबी, वैशाली और वसुंधरा में प्रदूषण से बचने के लिए 60 फीसदी लोगों ने अपने घरों में एयर प्यूरिफायर लगवा लिए हैं। इसके बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है।

दिल्ली एनसीआर में ग्रेप लागू किया गया है। अधिकारी ग्रेप का पालन करने में नाकाम हो रहे हैं। ग्रेप का कोई असर जमीन पर नहीं दिख रहा है। नियमों का उल्लंघन कर धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहे हैं। खुले में निर्माण सामग्री रखी जा रही है। जिले में टूटी सड़कें, उड़ती धूल, वाहनों की ज्यादा संख्या और जाम के कारण प्रदूषण खतरनाक स्थिति में बरकरार है। प्रशासन ने जिले में दीवाली पर पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगाने का दावा किया था। तमाम दावे पटाखों के धुएं में उड़ गए। दिवाली के दिन शाम से ही प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच गया। बृहस्पतिवार को 473 एक्यूआइ दर्ज किया गया था। शनिवार को भी प्रदूषण से राहत नहीं मिली। सुबह के समय ²श्यता कम रही। दमघोंटू हवा के कारण सांस के रोगी घरों में कैद हो गए। लोग मास्क लगाकर घर से बाहर निकले।

---------- पराली भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार दीवाली पर पटाखे जलाने के साथ पराली का धुंआ भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। हालांकि अपने जिले में पराली जलाने के केस कम हैं लेकिन एक खेत में भी पराली जलने पर अधिक प्रदूषण फैल जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी प्रदूषण के लिए पराली को 30 प्रतिशत जिम्मेदार बता रहे हैं। पराली आसपास के जिले व राज्यों में जलाई जा रही है। वहां से जिले में पराली का धुंआ आ रहा है।

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जिले में प्रदूषण की स्थिति क्षेत्र का नाम एक्यूआइ

वसुंधरा 461

इंदिरापुरम 466

संजय नगर 463

लोनी 475

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प्रदूषण फैलाने पर जुर्माना खुले में कूड़ा जलाने पर - 25 से 50 हजार रुपये

खुले में रखी सामग्री - 10 हजार से पांच लाख रुपये

सड़क पर धूल उड़ाने पर - पांच से 50 हजार रुपये

उद्योगों द्वारा प्रदूषण फैलाने पर- पांच हजार रुपये प्रतिदिन

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प्रदूषण के कारण हवा में मौजूद बारीक कण (10 से कम पीएम के मैटर), ओजोन, सल्फर डायआक्साइड, नाइट्रिक डाइआक्साइड से सांस की नली में सूजन होता है, इसके अलावा एलर्जी और फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में सांस रोगी घर पर भी मास्क लगाए रहें। - डा. शरद जोशी, वरिष्ठ फेफड़ा रोग विशेषज्ञ, मैक्स अस्पताल वैशाली

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सांस के रोगियों को एन 95 मास्क लगाकर ही बाहर निकलना चाहिए। जब तक प्रदूषण खतरनाक स्थिति में है, तब तक घर से कम ही बाहर निकलें। - डा. अर्जुन खन्ना, फेफड़ा रोग विशेषज्ञ, यशोदा अस्पताल

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प्रदूषण की वजह से बुजुर्ग और सांस के रोगियों को परेशानी हो रही है। प्रदूषण की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदूषण रोकने में अधिकारी नाकाम हैं।

- विजय कुमार मिश्रा, वरिष्ठ नागरिक

Edited By: Jagran