आशुतोष गुप्ता, गाजियाबाद

मसूरी थाना क्षेत्र के डासना देवी मंदिर में बुधवार रात घुसे दो संदिग्धों के मामले में गुत्थी उलझती जा रही है। अभी तक उनकी मंदिर में घुसने की मंशा का पुलिस पता नहीं लगा सकी है। अंदेशा जताया जा रहा है कि दोनों संदिग्ध कहीं मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की रेकी करने तो नहीं घुसे थे। यदि ऐसा है तो बड़ा सवाल यह है कि वह किसके कहने पर सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल करने के आए थे। ऐसी स्थिति में उन्हें मोटिवेट करने वाले तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मई में डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या के लिए आ रहे आतंकी कश्मीर निवासी जान मोहम्मद डार उर्फ जहांगीर को गिरफ्तार किया था। वह पाकिस्तान में बैठे जैश के एक आतंकी के कहने पर आया था। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया था कि डासना देवी मंदिर में मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है। इस कारण वह साधु के वेश में महंत की हत्या करने की फिराक में था। इसके साथ ही अंदेशा जताया जा रहा है कि विपुल विजयवर्गीय हिदू होने का लाभ उठाकर तो मंदिर में नहीं घुसा था और इसी के चलते उसने मंदिर के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों के पास रजिस्टर में अपने साले कासिफ का नाम काशी गुप्ता नोट कराया। हालांकि पूर्व में विपुल विजयवर्गीय ने धर्म परिवर्तन कर कासिफ की बहन के साथ रमजान उर्फ विजयवर्गीय बनकर निकाह किया था। एक बार को मान भी लें कि वह मंदिर के महंत यति के साथ शास्त्रार्थ के लिए आया था तो वह अपने साथ तीन सर्जिकल ब्लेड क्यों लेकर आया?

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आंध्र प्रदेश के व्यक्ति से पूछा था कौन सा वेद खरीदूं विपुल विजयवर्गीय व उसके साले कासिफ ने मंदिर में आने से पहले जिस किताब की दुकान पर छह घंटे बिताए थे, वहां से उसने वेद खरीदने के लिए आंध्रप्रदेश के एक गौतम नामक व्यक्ति को फोन किया था। गौतम से विपुल ने पूछा था कि वह वेद का कौन सा वर्जन खरीदे पुराना या नया। इस पर गौतम ने कहा था कि वेद का पुराना वर्जन खरीदो। इसके बाद विपुल ने दुकान से वेद का पुराना वर्जन खरीदा था। दुकान पर मौजूद व्यक्ति ने पूछा था कि यह गौतम कौन है, इस पर विपुल ने कहा था कि गौतम नहीं गौतम जी बोलो।

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इन सवालों के नहीं मिले जवाब - मंदिर के गेट पर बोर्ड लगा है कि यहां मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, इसके बाद भी उन्होंने मंदिर में प्रवेश क्यों किया?

- मंदिर परिसर में घुसते समय पुलिसकर्मियों ने कहा कि महंत मंदिर में नहीं हैं, इसके बाद भी वह मंदिर में क्यों घुसे?

- विपुल ने रजिस्टर में अपनी एंट्री तो सही नाम से की लेकिन कासिफ का नाम काशी गुप्ता क्यों लिखा?

- 27 मई से विपुल गाजियाबाद आया हुआ था और शहर में घूम रहा था, बावजूद इसके वह दिन में मंदिर क्यों नहीं आया, उसने मंदिर में आने के लिए रात का समय ही क्यों चुना?

- छह घंटे तक वह किताब की दुकान पर क्यों रुके रहे। आखिर शाम होने का इंतजार वह क्यों कर रहे थे?

Edited By: Jagran