'जज साहब पिता ही बना हैवान, घर में अकेली देख की दरिंदगी', कोर्ट ने आरोपी को सुनाई 20 साल की सजा
गाजियाबाद में 13 साल नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने सौतेले पिता को 20 साल की ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर (AI-Generated)
HighLights
सौतेले पिता को 20 साल का कठोर कारावास
13 साल की नाबालिग से दुष्कर्म मामले में अदालत का फैसला
पीड़िता के बयान पर दोषी को मिली सजा
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नीरज गौतम की अदालत ने आरोपित दीपक को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अर्थदंड न देने पर आरोपी को तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने पीड़िता ने कहा था कि सौतेले पापा एक साल से उसके साथ दुष्कर्म कर रहे थे।
13 साल की नाबालिग के साथ पिता करता था दुष्कर्म
विशेष लोक अभियोजक उत्कर्ष वत्स ने बताया कि पीड़िता की मां अपने पूर्व पति से अलग होकर आरोपी दीपक के साथ बहरामपुर में किराये के मकान में रह रही थी। महिला ने अपने पति को छोड़कर दीपक से मंदिर में शादी कर ली थी। पूर्व पति से उसके एक बेटा और 13 वर्षीय बेटी थी।
13 फरवरी 2023 महिला काम पर बाहर गई हुई थी। घर में बच्चों को अकेला पाकर आरोपित दीपक ने छोटे बेटे को खेलने के बहाने छत पर भेज दिया। आरोपी ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। मां के घर लौटने पर पीड़िता ने घटना की जानकारी दी। जब मां ने खुद को बेटी का दोस्त बताते हुए गहराई पूछा तो उसने बताया कि पापा एक साल से उसके साथ दुष्कर्म कर रहे थे।
क्रॉसिंग रिपब्लिक थाने में रिपोर्ट दर्ज
जिसके बाद क्रॉसिंग रिपब्लिक थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसकी मां, डाक्टर व विवेचक समेत सात गवाहों के बयान दर्ज कराए। पीड़ित ने अदालत को बताया कि आरोपी सौतेला पिता मां के बाहर जाने पर उसके साथ दुष्कर्म करता था।
चिकित्सीय परीक्षण में शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई थी, लेकिन अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का उल्लेख करते हुए माना कि पाक्सो मामलों में पीड़िता का सुसंगत और विश्वसनीय बयान ही दोष सिद्ध के लिए पर्याप्त है। अदालत ने आरोपी दीपक को धारा 376(3) भारतीय दंड संहिता और पाक्सो एक्ट की धारा छह के तहत दोषी पाया।
पीड़िता के हक में अदालत का आदेश
न्यायालय ने आदेश दिया कि वसूली गई 50 हजार रुपये की पूरी अर्थदंड राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गाजियाबाद को भी पीड़िता के मानसिक और शारीरिक पुनर्वास के लिए उचित प्रतिकर राशि प्रदान करने की सिफारिश की गई है। सजा के बाद आरोपित को जिला जेल भेज दिया गया है।
