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सिम कार्ड नहीं इस्तेमाल करता है मालदा का सौरभ दास, Free Wifi से चला रहा चोरी के मोबाइल का इंटरनेशनल सिंडिकेट

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:10 AM (IST)

सौरभ दास नामक मालदा निवासी व्यक्ति दिल्ली और गाजियाबाद रेलवे स्टेशनों से चोरी हुए महंगे मोबाइल फोन का एक अंतरराष्ट्रीय ...और पढ़ें

जीआरपी द्वारा गिरफ्तार मोबाइल तस्करी के आरोपित की जानकारी देते जियाउर्रहमान की जानकारी देते अधिकारी। जागरण आर्काइव

जीआरपी द्वारा गिरफ्तार मोबाइल तस्करी के आरोपित की जानकारी देते जियाउर्रहमान की जानकारी देते अधिकारी। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. सौरभ दास मालदा से चलाता है अंतरराष्ट्रीय मोबाइल चोरी सिंडिकेट।

  2. सिम कार्ड नहीं, फ्री वाई-फाई से करता है नेटवर्क का संचालन।

  3. जीआरपी के लिए सौरभ दास को पकड़ना बड़ी चुनौती बना।

हसीन शाह, गाजियाबाद। दिल्ली और गाजियाबाद के रेलवे स्टेशनों से यात्रियों के महंगे मोबाइल चोरी कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने वाले एक बड़े सिंडिकेट को बंगाल के मालदा निवासी सौरभ दास संचालित कर रहा है।

कैसे चला रहा था पूरा काला कारोबार?

आरोपित महज 40 हजार रुपये की कीमत वाले मोबाइल और अन्य महंगे स्मार्टफोन को मात्र एक हजार रुपये में खरीदता है। इसके बाद एक साथ 100 से 200 मोबाइलों की खेप पहले बंगाल भेजी जाती है और वहां से उन्हें सीमा पार बांग्लादेश तक खपाया जाता है।

सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं करता

इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट के सरगना सौरभ तक पहुंचना जीआरपी के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सौरभ दास इतना शातिर है कि वह सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं करता है। अपने नेटवर्क को संचालित करने के लिए वह रेलवे स्टेशन अन्य सरकारी व निजी संस्थानों में लगे फ्री वाई-फाई का उपयोग करता है। यही वजह है कि जीआरपी को न तो उसकी लोकेशन मिल पा रही है और न ही उसका आईपी एड्रेस का पता चल पा रहा है।

सौरभ दास खुद एक लोकेशन पर नहीं टिकता

गाजियाबाद और दिल्ली रेलवे स्टेशनों से लोगों को महंगे मोबाइल चोरी होते हैं। जीआरपी के विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के मिठाई पुल के नाम से चर्चित पुल के पास यह नेटवर्क अधिक सक्रिय रहता है लेकिन सौरभ दास खुद एक लोकेशन पर नहीं टिकता है।

कभी वह बंगाल के मालदा चला जाता है तो कभी दिल्ली और गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर गिरोह को संचालित करने का खाका तैयार करता है। उसके द्वारा बिना सिम के केवल वाई-फाई के जरिए इंटरनेट काॅलिंग और चैटिंग एप का उपयोग करने के कारण उसे पकड़ना जीआरपी के लिए चुनौती बना है।

आईपी एड्रेस तक का पता नहीं चला पहा रहा

रेलवे स्टेशनों या सार्वजनिक स्थलों के सरकारी और पब्लिक वाई-फाई हाॅटस्पाॅट के जरिए इंटरनेट काॅलिंग करने पर उसका सटीक आईपी एड्रेस ट्रैक करना बेहद जटिल हो गया है। वह लगातार अलग-अलग हाॅटस्पाॅट का इस्तेमाल करता है। अब जीआरपी इस शातिर तस्कर के डिजिटल फुटप्रिंट खंगालने के लिए इंटरनेट डेटा पैकेट एनालिसिस, मैक (एमएसी) एड्रेस ट्रैकिंग और वाई-फाई राउटर लाग्स जैसी आधुनिक तकनीक का सहारा लेने की तैयारी कर रही हैं।

पकड़ा गया था गिरोह का गुर्गा

जीआरपी ने नौ अक्टूबर को इस गिरोह के एक गुर्गे को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। जिसके पास से विभिन्न कंपनियों के 100 चोरी के मोबाइल बरामद हुए थे। तभी से पुलिस इस पूरे नेटवर्क की चेन जोड़ने में जुटी है। अब आकर पुलिस को पता चला है कि इस गिरोह का मुख्य सरगना मालदा का सौरभ दास है। आरोपित कभी किसी अपने गुर्गे से सीधे नहीं मिलता है। हालांकि जीआरपी ने उसके कुछ अहम दस्तावेज हासिल कर लिए हैं।