जासं, गाजियाबाद: कूड़े को लेकर शुरू हुई सियासत से शहर में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था चौपट हो गई है। जिस कारण शहरियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क, सरकारी अस्पताल, कोर्ट परिसर में भी अब कूड़े का अंबार लग रहा है। राजनगर एक्सटेंशन के पास डंपिग ग्राउंड को बंद हुए 30 दिन हो गए हैं, अब तक नगर निगम को दूसरी जगह नहीं मिली है। महापौर, विधायक और पार्षद भी शांत:

एक तरफ जहां डेंगू, मलेरिया के मरीजों की संख्या शहर में बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ 10 दिन से शहर में कूड़ा नहीं उठ रहा है। इसके बावजूद महापौर, विधायक, पार्षद इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रभावी कदम उठाते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। नगर निगम के अधिकारी समस्या के समाधान के लिए हापुड़ जिला प्रशासन से पत्राचार कर रहे हैं, जिससे कि उनको गालंद में कूड़ा निस्तारण में विरोध का सामना न करना पड़े। लेकिन फिलहाल बात बनती नजर नहीं आ रही है। नगर निगम के साथ जीडीए, जिला प्रशासन की जिम्मेदारी : पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना है कि सैनिटरी लैडफिल साइट विकसित करके नगर निगम को हैंडओवर करने की जिम्मेदारी जीडीए की है। जो अब तक नहीं किया गया है। गालंद में जमीन दी गई है, जिसका विरोध किया जा रहा है। आंकड़े

शहर की आबादी - 25 लाख प्रतिदिन कूड़ा उत्सर्जन - 1,500 टन

गाड़ियां - 300 कर्मचारी - 600

कूड़ा कलेक्शन प्वाइंट - 10 कूड़ा निस्तारण केंद्र - एक

2020-21 में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था के लिए प्रस्तावित बजट - 133 करोड़ रुपये परिचर्चा लोग फोन कर कूड़ा न उठने की शिकायत कर रहे हैं। इस पर नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर और महापौर आशा शर्मा को निर्णय लेना है।

- हिमांशु मित्तल, भाजपा पार्षद कूड़ा निस्तारण में आ रही समस्या का समाधान कराने की जिम्मेदारी महापौर की है। हम इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाएंगे।

- जाकिर अली सैफी, कांग्रेस पार्षद नगर निगम ने डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए 300 से अधिक गाडियां चला रखी हैं, लेकिन उनके पास कूड़ा निस्तारण के लिए जगह नहीं है।

- आनंद चौधरी, बसपा पार्षद बयान गालंद में कूड़ा निस्तारण के लिए जगह है। वहां पर हो रहे विरोध प्रदर्शन के कारण कूड़ा डालने में रुकावट आ रही है। समस्या का समाधान जल्द ही किया जाएगा। फिलहाल शक्ति खंड, सिहानी, प्रताप विहार और मोरटा में कूड़ा निस्तारण के लिए भेजा जा रहा है।

- डा. मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

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