जागरण संवाददाता, साहिबाबाद :

दिल्ली से सटे ट्रांस हिडन में मानवता को शर्मसार करने वाली दो घटनाएं सामने आई हैं। पहली घटना में एक बेटा अपने सेवानिवृत्त शिक्षक पिता को लेकर दिल्ली से लेकर गाजियाबाद तक के अस्पताल में इलाज के लिए चक्कर काटता रहा। कहीं भी इलाज नहीं मिला। वैशाली सेक्टर एक में बेटे के सामने पिता ने दम तोड़ दिया। कोई राहगीर भी मदद के लिए सामने नहीं आया। वहीं, दूसरी ओर शालीमार गार्डन में एक स्कूल में कोरोना से संक्रमित चौकीदार ने दम तोड़ दिया। चौकीदार की पत्नी 24 घंटे तक साथ रही। जानकारी मिलने पर आनन फानन में प्रशासन ने स्कूल को सील किया।

दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर में यशवीर सिंह परिवार के साथ रहते हैं। उनके पिता सुर्जन सिंह (65) सेवानिवृत्त शिक्षक थे। कुछ दिन पूर्व सुर्जन सिंह के सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिवार के लोग उन्हें दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में ले गए। जांच में पता चला की सीने में संक्रमण है। कोरोना संक्रमण के संदेह में उन्हें दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यशवीर सिंह के साले हरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि जीटीबी में बीते रविवार को जांच के बाद बताया कि कोरोना संक्रमित नहीं हैं। देर रात सभी लोग घर आ गए। सोमवार को सुर्जन सिंह के शरीर में आक्सीजन की मात्रा घटने के साथ सांस लेने में तकलीफ होने लगी। यशवीर और हरेंद्र उन्हें लेकर दिल्ली और गाजियाबाद के कई अस्पतालों में गए। सोमवार को पूरा दिन वह एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में सुर्जन सिंह के इलाज के लिए भटकते रहे आरोप है कि किसी अस्पताल ने इलाज नहीं किया। सोमवार शाम चार बजे यशवीर अपने पिता को एक अन्य अस्पताल ले जा रहे थे। तभी वैशाली सेक्टर एक में उनके पिता ने आक्सीजन न मिलने से दम तोड़ दिया।

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कोई मदद को नहीं आया सामने : हरेंद्र सिंह का कहना है कि वह दो घंटे तक शव लेकर सड़क किनारे खड़े रहे, कोई मदद के लिए सामने नहीं आया। बाद में स्थानीय पार्षद मनोज गोयल को जानकारी मिली तो वह मौके पर पहुंचे और एंबुलेंस की व्यवस्था कर शव को घर भेजा। हरेंद्र का कहना है कि एक साल में सरकार की ओर से आक्सीजन और अस्पतालों में बेड तक की व्यवस्था नहीं हो सकी लिहाजा मरीजों की इलाज के अभाव में मौत हो रही है।

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कोरोना से मौत, शव के साथ पत्नी ने बिताए 24 घंटे :

शालीमार गार्डन एक्सटेंशन - एक में एनसीपी स्कूल के चौकीदार की कोरोना संक्रमित होने से इलाज के अभाव में मौत हो गई। चौकीदार की चार दिन पहले कोरोना की रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। आरोप है कि जिला प्रशासन को सूचना देने के बाद भी चौकीदार को इलाज नहीं मिला। बाद में जब प्रशासन ने सुध ली तब तक चौकीदार की मौत हुए 24 घंटे बीत चुके थे। 24 घंटे से पत्नी शव के साथ थी। वह रो रही थी। इसके बाद नगर निगम की टीम ने स्कूल को सील कर दिया। इस घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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