जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : हिदी रंगमंच के हास्य प्रधान नाटक राधे राधे हम सब आधे का मंचन प्रथम पथ थिएटर द्वारा गुरुकुल द स्कूल में शनिवार को किया गया। शुरू से अंत तक हंसते-हंसते दर्शकों के पेट में बल डाल दिए। मशहूर उपन्यासकार एवं पेंटर आर्टिस्ट आबिद सुरती द्वारा लिखित नाटक का निर्देशन प्रथम पथ थिएटर के सुधीर राणा ने किया। नाटक में बताने का प्रयास किया गया कि कोई भी इंसान परिपूर्ण नहीं होता, हर आदमी अधूरा होता है। बताया गया कि पुराने ऋषि मुनियों ने कहा है कि स्त्री के अंदर पुरुष के कुछ अंश मौजूद होते हैं, वैसे ही पुरुष के अंदर भी स्त्री का अस्तित्व कुछ मात्रा में जरूर होता है। इस नाटक का हीरो राधाकृष्ण उनमें से एक है जो एक मर्द होते हुए भी अपने आप की जगह एक स्त्री को महसूस करता है। राधाकृष्ण के अलावा कोई उसे राधे कहकर पुकारता है तो वह उसे बेहद पसंद है। राधाकृष्ण अपनी आदतें पसंद नापसंद बातें एक युवती की भांति रखता है। राधेकृष्ण के अंकल भवानी प्रसाद और आंटी जया गौरी राधे के विवाह की समस्या को लेकर परेशान है। राधे के अंदर का कृष्ण जग उठे इसके लिए डा. सतीश कुसुम की मदद लेते हैं। कितु इलाज के चक्कर चलाते हुए वह खुद उसमें बुरी तरह से फंस जाते हैं और राधे उन्हों अपना पति बना कर प्रेम बंधन में ऐसे फिसल पड़ता है कि दर्शक हंस-हंसकर लोटपोट हो जाते हैं। डा. सतीश की प्रेम त्रिकोण वाली कहानी और बीवी बना हुआ राधे कृष्ण मनोरंजन का केंद्र होते हैं। राधाकृष्ण और डा. सतीश की मनोरंजन और मुश्किल भूमिकाओं को सुमित दुबे और विष्णु ग्रोवर ने निभाया। नाटक में पदम शर्मा और कुहू सिन्हा का अभिनय भी बहुत पसंद किया गया। संकल्प श्रीवास्तव के संगीत ने नाटक को रोचक बनाये रखा। ग्रुप के अन्य सदस्यों गुरप्रीत कौर, गुरमीत चावला, प्रज्ञा, श्वेता, अजीत, दिव्यांशु और स्मृति ने दमदार अभिनय किया।

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