जासं, गाजियाबाद : आज की भाषायी स्थिति को देखे तो लगता है कि अंग्रेजी नहीं आती तो व्यक्ति समाज में सम्मान के योग्य ही नहीं रह जाता है। जहां देखे अंग्रेजी बोलने वाले व्यक्ति को ही लोग सम्मान के नजरिये से देखते हैं। बड़े स्कूल में बच्चे का दाखिला कराना हो तो माता पिता को अंग्रेजी आनी जरूरी है। साहित्यकारों का कहना है कि जब तक भाषायी आत्मनिर्भरता नहीं होगी तब तक आत्मनिर्भर देश का सपना अधूरा रहेगा। हमें हिदी बोलने पर गर्व महसूस करना चाहिए।

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देश के सर्वेच्च न्यायालय की भाषा अंग्रेजी है। कोई याचिका भी दायर करनी हो तो अंग्रेजी आना जरूरी है या फिर वही दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता। हिदी माध्यम से पढ़ाई की तो भाषायी आत्मनिर्भर नहीं हैं तो देश आत्मनिर्भर कैसे हो सकता है। आत्मनिर्भर देश के लिए सर्वेच्च न्यायालय की भाषा हिदी भी हो।

रंजना झा, साहित्यकार

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हमें हिदी बोलने पर गर्व होना चाहिए। स्कूलों में भी आजकल अंग्रेजी पर ध्यान ज्यादा दिया जा रहा है। इससे हिदी को भारी क्षति पहुंची है। स्कूलों में हिदी को बढ़ावा मिलना चाहिए। हिदी बोलने पर हमें गर्व करना चाहिए। हिदी देश को एक सूत्र में जोड़ने वाली भाषा है।

संदीप सुकुमार, कवि

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