जागरण संवाददाता, साहिबाबाद : गाजियाबाद के लोगों को जहरीली आबोहवा से निजात मिलती दिखाई नहीं दे रही है। सोमवार को भी गाजियाबाद एनसीआर का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 365 रहा, जो सामान्य से करीब चार गुना है। प्रशासन प्रदूषण कम करने के दावे तो कर रहा है, लेकिन उसकी कार्रवाई पूरी तरह फेल नजर आ रही है।

गाजियाबाद में सड़कों पर उड़ती धूल और फैक्ट्रियों से निकलता धुआं प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। लोनी और देहात क्षेत्रों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों में तार जलाया जाता है। इसके साथ ही आए दिन लोग कूड़े में आग लगा देते हैं। इससे गाजियाबाद के लोगों का दम घुट रहा है। सोमवार को गाजियाबाद ग्रेटर नोएडा के बाद दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। ग्रेटर नोएडा का एक्यूआइ 384 तो गाजियाबाद का 365 रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक उत्सव शर्मा ने बताया कि लगातार प्रदूषण फैला रहे लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही सड़क पर निर्माण सामग्री रखने वालों पर भी जुर्माना किया जा रहा है। हवा की गति बढ़ने पर प्रदूषण की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।

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