नई दिल्ली/गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले चार महीने से दिल्ली-एनसीआर के तीन बॉर्डर (टीकरी, सिंघु और गाजीपुर) पर जमा हैं। यह अलग बात है कि इन तीनों धरना-प्रदर्शन स्थलों पर भीड़ गायब है और किसान संगठनों में इसको लेकर निराशा है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि कौन भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की अनुपस्थिति में गाजीपुर बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन की अगुवाई करता है। इनमें दो नाम हैं। पहला गौरव टिकैत जो भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत के बेटे और राकेश टिकैत के भतीजे हैं। वहीं, दूसरा नाम है जगतार सिंह बाजवा।  अक्सर राकेश टिकैत के साथ नजर आने वाले जगतार सिंह बाजवा संयुक्त किसान मोर्चा गाजीपुर बॉर्डर के प्रवक्ता भी हैं। इन्हें राकेश टिकैत भी खासा सम्मान देते हैं। वहीं, गौरव टिकैत भी राकेश टिकैत की गैरमौजूदगी में कई बार मंच का संचालन करते नजर आते हैं।

कौन हैं गौरव टिकैत

गौरव टिकैत चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के पोते हैं। राकेश टिकैत के भतीजे गौरव टिकैत भी किसान आंदोलन में लगातार सक्रिय हैं। वह अक्सर गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के बीच नजर आते हैं।

इस बीच तीनों कृषि कानूनों के विरोध में 28 नवंबर से यूपी गेट पर चल रहा धरना सोमवार को भी जारी है। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने यहां बैठक कर आगे की रणनीति बनाई।

रविवार को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की अनुपस्थिति में यहां गाजीपुर पर जमा प्रदर्शनकारियों कहा कि केंद्र सरकार धरना को समाप्त कराने के लिए तमाम साजिश रच रही है, लेकिन उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। तीनों कानूनों के वापस होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनने तक धरना जारी रहेगा। गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे धरना प्रदर्शन की अगुवाई भारतीय किसान यूनियन के दिग्गज नेता राकेश टिकैत कर रहे हैं, जो यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं।

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वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा गाजीपुर बॉर्डर के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा (Jagtar Singh Bajwa, spokesperson of the Bhartiya Kisan Morcha Ghazipur Border) ने कहा कि रविवार को हुई बैठक में तय किया गया है कि धरना-प्रदर्शन स्थल पर कोरोना वायरस संक्रमण और गर्मी को देखते हुए खाने-पीने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी को कोई समस्या न हो।

वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि धरना को बदनाम करने की नीयत से पुलिस की तीन गाड़ियों के साथ रविवार को एक आक्सीजन का टैंकर लगाया गया। जबकि अन्य वैकल्पिक रास्ते खुले हैं। बैठक में राजवीर सिंह जदौन, डीपी सिंह, बलजिंदर मान, आशीष मित्तल आदि मौजूद थे।

यहां पर बता दें कि तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ गाजीपुर बॉर्डर पर 28 नवंबर, 2020 से  ही किसानों का धरना-प्रदर्शन जारी है। 

यूपी गेट किसान आंदोलन को चलते 5 महीने से भी अधिक का समय हो गया। गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी के दिन किसान ट्रैक्टर परेड के बाद दिल्ली में हुए उपद्रव के बाद यहां बसा तंबू का शहर लगातार दिनोंदिन सिमट रहा है। रिंग रोड से लेकर हाईवे और फ्लाईओवर पर लगे तंबू धीरे-धीरे हट गए हैं। आलम यह है कि फिलहाल कहीं फोल्डिग तंबू लगे रहे तो उनमें से आंदोलनरत किसान गायब मिले। अब स्थिति यह है कि यहां पर चंद किसान प्रदर्शनकारी ही बचे हैं।

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