समाज के एक बड़े वर्ग में आज भी लड़कियों को सिर्फ घर के काम-काज करने तक ही सीमित माना जाता है। लेकिन, कुछ कर दिखाने की जिद इंसान को नहीं रोक सकती है, फिर चाहे अपनों की बंदिशें ही क्यों न हों। ऐसी ही बंदिशों को पार कर सफलता के शिखर पर पहुंची हैं दमदार अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी बबीता नागर। 

गौतम बुद्ध नगर जिले की निवासी बबीता ने अपने आत्मविश्‍वास और बुलंद हौसले के सहारे हमेशा हर मुश्किल पर जीत पाई है, चाहे वह खेल का मैदान हो या पुलिस की नौकरी। बचपन में बबीता ने लड़कों को कुश्ती करते देखा। वह भी कुश्ती करने लगीं और स्पोर्ट्स कोटा के तहत दिल्ली पुलिस में नौकरी पाई। वर्ष 2005 में कामनवेल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया और रजत पदक जीतीं। आज वह दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं। 

बबीता हर एक लड़की से यही कहती हैं कि बदलाव ही प्रकृति का नियम है। खुद पर विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है। वह हर उस लड़की की मदद करती हैं, जो अपने सपनों को लेकर उनके पास आती है। आज बबीता द्वारा चलाए जाने वाले कुश्‍ती प्रशिक्षण संस्थान में कई लड़कियां भविष्य की विजेता बनने की तैयारी कर रहीं है।

उनको शारिरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना ही बबीता का पहला लक्ष्य है। उनके इस दमदार प्रयास के कारण उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें यूथ आइकन अवार्ड से सम्मानित किया है। बबीता ने भारतीय खेल प्राधिकरण की परीक्षा में ए ग्रेड प्राप्त किया। साथ ही वह दिल्ली पुलिस की सीपी गोल्ड मेडल भी जीत चुकी हैं।

क्या आपके पास है ऐसी दमदार कहानी? हम छाप सकते हैं आपकी कहानी।

आज ही हमें शेयर करें deshkistory@gmail.com पर।

Edited By: Tilakraj