गाजियाबाद, जेएनएन। दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद के रहने वाले नरेंद्र कुमार कश्यप का रिटायरमेंट के दिन हेलिकॉप्टर से घर का सपना तो टूटा साथ ही उन्होंने 4.5 लाख रुपये तक गवां दिए। दरअसल, नरेंद्र कुमार ने 31 अगस्त यानी अपनी रिटायरमेंट के दिन हेलिकॉप्टर बुक करने के साथ प्रशासन से एनओसी लेने के लिए एक एजेंट को 4.5 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए थे। वहीं, एनओसी नहीं मिलने की स्थिति नरेंद्र हेलिकप्टर से घर नहीं लौटे। अब पैसे भी वापस नहीं पा रहे हैं।

हताश-निराश नरेंद्र कुमार ने अब गाजियाबाद नगर निगम में कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरेंद्र नागर से गुजारिश की है कि उनका पैसा वापस कराया जाए। नरेंद्र की गुजारिश पर हरेंद्र नागर ने बताया है कि उस एजेंट से बात की जाएगी, अगर नहीं बात बनी तो पुलिस की भी सहायता लेंगे।गौरतलब है कि नरेंद्र कुमार गाजियाबाद नगर निगम (Ghaziabad Municipal Corporation) में पंप ऑपरेटर के पद से 31 अगस्त को रिटायर हुए थे। दिन भी शनिवार होने की वजह से अपनी रिटायरमेंट को यादगार बनाने के लिए उन्होंने गाजियाबाद से मोदीनगर स्थित अपने गांव अतरौली हेलिकॉप्टर से जाने की योजना बनाई थी।

उधर, कविनगर रामलीला मैदान से उड़ान भरने में पुलिस ने सहमति नहीं दी। नरेंद्र कुमार की मानें तो ट्रैफिक पुलिस ने एनओसी नहीं दी। वहीं, नरेंद्र ने गांव में हेलीपेड बनवाया था, इस पर अलग से 25 हजार रुपये खर्च हुए थे।

यह है पूरा मामला

नगर निगम के जलकल विभाग में तैनात पंप चालक नरेंद्र कुमार शनिवार (31 अगस्त) को सेवानिवृत हो रहे हैं। हवा में सैर करने की तमन्ना को पूरा करने के लिए उन्होंने सेवानिवृति का दिन तय किया था। अरिहंत हेलिकॉप्टर सर्विस का हेलिकॉप्टर बुक कराया था। तीन दिन पहले जिला प्रशासन में अनुमति के लिए आवेदन किया था। योजना थी कि सेवानिवृत होकर पत्नी कमलेश कश्यप, बड़ी बेटी पूनम और मझली बेटी रीना के साथ कविनगर रामलीला मैदान से हेलिकॉप्टर में मोदीनगर तहसील के अंतर्गत अपने गांव अतरौली तक जाएंगे। तीन दिन में नरेंद्र कुमार को पीडब्ल्यूडी, जीडीए, भारतीय वायुसेना, अग्निशमन विभाग से ही मंजूरी मिल पाई। यातायात निरीक्षक की मंजूरी नहीं मिल पाई। शुक्रवार को अनुमति की समयावधि खत्म होने पर पंप चालक को अपना आवेदन वापस लेना पड़ा।

90 फीसद पैसा होगा वापस, उठ रहे सवाल

पंप चालक नरेंद्र कुमार कश्यप चौपला मंदिर के पास नगर निगम के ट्यूबवेल पर कार्यरत थे। वह अगस्त 1981 में नगर निगम में अस्थायी कर्मचारी के रूप में भर्ती हुए थे। वर्ष 1994 में उन्हें स्थाई कर दिया गया। सेवानिवृत्ति पर करीब 16 लाख रुपये उन्हें मिलने वाला है।, जिसमें से चार लाख रुपये उन्होंने हेलीकॉप्टर बुक कराने पर खर्च किए थे। जिस ट्रेवल एजेंसी के जरिए बुकिग कराई गई, उसके संचालक का कहना है कि 90 फीसद पैसा वापस हो जाएगा। औपचारिकताएं पूरी करने में खर्च हो चुकी रकम वापस नहीं होगी। अब मामला लटकता नजर आ रहा है।

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Posted By: JP Yadav

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