नई दिल्ली/गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। गाजियाबाद जल निगम व पुलिस की लापरवाही के कारण दिल्ली-मेरठ हाईवे पर सोमवार को ढाई माह बाद जाम की स्थिति बन गई। हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की करीब ढाई से तीन किलोमीटर लंबी कतारें लगने से लोग बेहाल हो गए। जाम से बचने के लिए कुछ लोगों ने हापुड़ रोड से होकर एक्सप्रेस-वे का रुख किया। जल निगम ने भगवानगंज मंडी के सामने दिल्ली-मेरठ हाईवे के किनारे पाइपलाइन डालने के लिए खोदाई की है। सड़क पर दूर तक मलबा डाल दिया है। मशीनरी भी सड़क पर खड़ी की गई है। इससे सड़क पर वाहनों के निकलने के लिए जगह नहीं बची। इसी कारण मेरठ से गाजियाबाद की ओर वाहनों की रफ्तार रुक गई। काफी देर तक भी जब यातायात सुचारु कराने के लिए कोई नहीं पहुंचा तो वाहनों की कतारें और लंबी होती चली गई।

मेरठ से गाजियाबाद की ओर लोगों को करीब ढाई, तीन किलोमीटर लंबे जाम में फंसकर मुसीबत झेलनी पड़ी। इसके अलावा बस अड्डे के आसपास सवारी बैठाने के चक्कर में 40 से ज्यादा ऑटो सड़क पर बेतरतीबी से खड़े हो गए। स्थिति उस समय ज्यादा बिगड़ गई, जब मेरठ परिवहन निगम और रोडवेज बस भी सड़क पर आगे-पीछे कुछ इस तरह खड़ी हो गई कि एक छोटे वाहन के निकलने की भी जगह नहीं बची। इससे गाजियाबाद से मेरठ की ओर वाहनों की कतारें लग गईं। देखते ही देखते उधर भी वाहनों की कतारें तेल मिल गेट के नाले तक जा पहुंची।

हद तो तब हो गई जब थाने की बात तो दूर बस अड्डे चौकी की पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर यातायात को सामान्य कराने की जरूरत नहीं समझी। इसी का परिणाम रहा कि लोगों को दो बजे से लेकर पांच बजे तक भीषण जाम से दो चार होना पड़ा।

इस बारे में सीओ मोदीनगर सुनील कुमार सिंह का कहना है कि जाम लगने की सूचना पर पुलिस को मौके पर भेजा गया था। ऑटो चालकों के चालान भी इस मामले में किए गए हैं। ध्यान रहे कि अप्रैल माह में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे शुरू हो गया था। इसके बाद दिल्ली-मेरठ हाईवे पर वाहनों का दबाव आधा रह गया है। तब से यहां जाम लगना बंद हो गया था।