बजट पर रही गाजियाबाद के लोगों में मिलीजुली प्रतिक्रिया, किसी ने सराहना तो किसी ने नकारा
मुरादनगर के ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्रीय बजट पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे संतुलित, आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य ...और पढ़ें
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गाजियाबाद के लोगों में बजट को लेकर प्रतिक्रिया।
HighLights
ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्रीय बजट को संतुलित बताया गया।
आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट की सराहना।
महंगाई, बेरोजगारी पर राहत न मिलने से निराशा व्यक्त।
संवाद सहयोगी, मुरादनगर। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए बजट को ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने संतुलित बताते हुए उसकी सराहना की। आत्मनिर्भर अभियान पर जोर देने के साथ महामारी के दौर में स्वास्थ्य क्षेत्र की बजट राशि बढ़ाने जाने जैसे कदमों को लोगों ने आम आदमी के हित में बताया।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण शुरू होने के साथ ही लोग अपने टीवी के सामने बैठ गए और प्रत्येक घोषणा को ध्यानपूर्वक सुनते रहे। वित्तमंत्री की प्रत्येक घोषणा के साथ ही लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । अधिकतर लोगों ने बजट को आम आदमी के लिए राहत प्रदान करने वाला बताया।
बजट पर लोगों की प्रतिक्रिया
बजट विकास को बढ़ावा देने वाला है। सभी सेक्टरों को पर्याप्त पैसा दिया गया है। वर्तमान सरकार का आत्मनिर्भर अभियान सराहनीय है। किसानों को भी बजट से लाभ मिलेगी। - जयदीप सिंह, जिलाध्यक्ष, युवा रालोद
बजट आम आदमी को राहत देने वाला है। आम आदमी की जीवन उपयोगी साम्रगियों कों सस्ता किया गया है। किसानों को फसलों के दाम पर बढोत्तरी की उम्मीद थी, लेकिन कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। - सतेंद्र त्यागी, किसान
सरकार ने संतुलित बजट पेश किया है। आम आदमी को राहत देने वाली कई घोषणा की गई है। बजट में सभी का ख्याल रखा गया है। तंबाकू उत्पाद महंगा कर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है। - बोबी पंडित, व्यापारी
2026 का बजट आम जनता को राहत देने में विफल रहा है, महंगाई और बेरोज़गारी पर ठोस समाधान नहीं दिखता। किसान, गरीब और मध्यम वर्ग के लिए घोषणाएं ज़्यादा हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बदलने वाले प्रावधान नज़र नहीं आते। - कृष्ण रुहेला, युवा
बजट से आम आदमी को निराश मिली है। बजट में किसान गरीब, कामगार, नौजवान के कुछ भी नहीं है। महंगाई, शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा के क्षेत्र में कई सुधार लंबे समय से लंबित हैं। उस दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। –
डॉ. बबली गुर्जर, समाजसेवी
