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गाजियाबाद की 400 हाईराइज सोसायटियों में डीजल का संकट, 10 लाख से ज्यादा लोग होंगे प्रभावित

Published: Mon, 15 Jun 2026 08:24 AM (IST)

केंद्र सरकार द्वारा डीजल बिक्री पर 200 लीटर की दैनिक सीमा तय करने से गाजियाबाद की 400 हाईराइज सोसायटियों में ...और पढ़ें

गंगा यमुना हिंडन सोसायटी में लगा जनरेटर।

गंगा यमुना हिंडन सोसायटी में लगा जनरेटर।

HighLights

  1. दैनिक 200 लीटर डीजल सीमा से सोसायटियों का बैकअप प्रभावित।

  2. बिजली कटौती में जनरेटर को अधिक डीजल की आवश्यकता होगी।

  3. लिफ्ट, पानी, सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएं होंगी बाधित।

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। केंद्र सरकार की ओर से डीजल बिक्री पर प्रतिदिन 200 लीटर की सीमा तय किए जाने से जिले की करीब 400 हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले 10 लाख से अधिक लोगों की चिंता बढ़ गई है। कारण यह है कि शहर की अधिकांश सोसायटियों में लगे 500 किलोवाट क्षमता के एक डीजल जनरेटर को ही बिजली कटौती के दौरान प्रति घंटे 80 से 100 लीटर डीजल की जरूरत पड़ती है।

सोसायटियों की बैकअप व्यवस्था पर संकट

ऐसे में यदि आंधी, वर्षा या तकनीकी खराबी के कारण तीन से चार घंटे बिजली गुल रहती है तो एक जनरेटर को 240 से 400 लीटर तक डीजल चाहिए होगा, जो नई निर्धारित सीमा से कहीं अधिक है। शहर की अधिकांश हाईराइज सोसायटियों में 500 से 1000 किलोवाट क्षमता के डीजल जनरेटर लगे हैं।

इन जनरेटरों के सहारे ही बिजली गुल होने पर लिफ्ट, पानी की मोटर, कामन एरिया लाइटिंग और अन्य आवश्यक सेवाएं संचालित होती हैं। सोसायटी पदाधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में बिजली कटौती सामान्य बात है और आंधी-वर्षा के दौरान कई-कई घंटे आपूर्ति बाधित रहती है।

ऐसे में डीजल उपलब्धता पर किसी भी तरह का संकट हजारों परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। सोसायटी प्रतिनिधियों के अनुसार यदि डीजल आपूर्ति प्रभावित होती है तो सबसे अधिक दिक्कत ऊंची मंजिलों में रहने वाले बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को होगी। पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है और आपात स्थिति में फायर फाइटिंग सिस्टम के संचालन पर भी असर पड़ सकता है।

वहीं वैकल्पिक माध्यमों से डीजल खरीदने की स्थिति में खर्च बढ़ेगा, जिसका बोझ निवासियों पर ही पड़ेगा। सोसायटी प्रतिनिधियों की मांग है कि हाईराइज आवासीय परिसरों को आवश्यक सेवा श्रेणी में रखते हुए डीजल आपूर्ति संबंधी नियमों में स्पष्ट छूट या अलग व्यवस्था की जाए, ताकि बिजली संकट की स्थिति में आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों।

डीजल की कमी हुई तो ये होंगी सबसे बड़ी परेशानियां

  • लिफ्ट संचालन प्रभावित होने से ऊंची मंजिलों पर रहने वालों को दिक्कत
  • पानी की मोटर बंद होने से जलापूर्ति बाधित
  • बेसमेंट, गलियारों और कामन एरिया में अंधेरा
  • फायर फाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर असर
  • बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों के लिए बढ़ेगी परेशानी
  • बढ़ सकता है सोसायटियों का मेंटेनेंस खर्च
  • लंबे बिजली संकट में आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होने का खतरा

आंकड़ों में समझिए सोसायटियों की चिंता

जिले की करीब 400 हाईराइज सोसायटियों में 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं। एक औसत 500 फ्लैट वाली सोसायटी में 800 से 1600 किलोवाट तक डीजी बैकअप क्षमता होती है। 500 किलोवाट का एक जनरेटर प्रति घंटे 80 से 100 लीटर डीजल की खपत करता है और लगभग 200 से 250 फ्लैटों को सीमित बैकअप बिजली उपलब्ध कराता है।

ऐसे में यदि तीन घंटे बिजली कटौती होती है तो 240 से 300 लीटर और चार घंटे कटौती होने पर 320 से 400 लीटर डीजल की आवश्यकता पड़ सकती है। जबकि नए नियम के तहत प्रतिदिन 200 लीटर डीजल की सीमा तय की गई है। यही वजह है कि लंबे बिजली संकट की स्थिति में सोसायटियों को जनरेटर संचालन प्रभावित होने की आशंका सता रही है।