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गाजियाबाद के श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर में शिवरात्रि को लेकर तैयारियां पूरी, जानिए कितने बजे से होगा जलाभिषेक

Published: Sun, 09 Aug 2026 08:13 AM (IST)

सावन की शिवरात्रि का त्योहार मंगलवार को मनाया जाएगा, जिसके लिए गाजियाबाद के श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर में तैयारियां पूरी हो ...और पढ़ें

कांवड़ मार्ग पर विशाल झूला कांवड़ लेकर आते शिवभक्त कांवड़िए। अनिल बराल

कांवड़ मार्ग पर विशाल झूला कांवड़ लेकर आते शिवभक्त कांवड़िए। अनिल बराल

HighLights

  1. शिवरात्रि त्योहार मंगलवार को, श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर में तैयारियां पूरी।

  2. रविवार को हाजिरी का जल, सोमवार को प्रदोष व्रत जलाभिषेक।

  3. शिवरात्रि पर सुबह छह बजे से पूरे दिन जलाभिषेक होगा।

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। सावन की शिवरात्रि का त्योहार मंगलवार को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर सभी शिवालयों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विशेष तौर पर श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ रहेगी।

बड़ी संख्या में कांवड़िए व अन्य भक्त भगवान श्री दूधेश्वरनाथ को जल चढ़ाएंगे। दो दिन पहले रविवार को श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर में भक्त हाजिरी का जल चढ़ाएंगे। वहीं सोमवार को भक्त त्रियोदशी व प्रदोष व्रत का जलाभिषेक करेंगे।

मंदिर के मीडिया प्रभारी एसआर सुथार ने बताया कि रविवार को सुबह छह बजे से कांवड़िये भगवान श्री दूधेश्वरनाथ को हाजिरी का जल चढ़ाएंगे। सोमवार को त्रियोदशी व प्रदोष व्रत का जल भक्त सोमवार को सुबह आठ बजे से अर्पित करेंगे।

वहीं चतुर्दशी यानि शिवरात्रि के दिन यानी मंगलवार को सुबह छह बजे से पूरे दिन व रात्रि जलाभिषेक होगा। मंदिर में आठों प्रहर रूद्राभिषेक किया जाएगा। सुबह और शाम भगवान श्री दूधेश्वरनाथ का शृंगार, पूजा अर्चना व आरती के साथ 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा।

महाकाल की झांकी और झूला कांवड़ ने खींचा ध्यान

कांवड़ मार्ग पर शनिवार को भगवान शिव के महाकाल और नीलकंठ स्वरूप में सजी भव्य झांकियों और झूला कांवड़ ने कांवड़ मार्ग पर विशेष तौर पर अपनी ओर ध्यान आकर्षित किया। झूला कांवड़ काफी भव्य तरीके से सजाई गई हैं। वहीं झांकियों के साथ चल रहे शिवभक्तों ने एक जैसे परिधान धारण किए हुए हैं।

तेज संगीत, डमरू की थाप और शिव भजनों के बीच कांवड़िये नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई समूहों ने अपनी कांवड़ और झांकियों को विशेष थीम के आधार पर सजाया है। किसी कांवड़ पर विशाल त्रिशूल और डमरू नजर आया तो किसी पर कैलाश पर्वत का दृश्य उकेरा गया।

रुद्र, रुद्रेश्वर और विश्वनाथ के जयघोष के साथ आगे बढ़ते कांवड़ियों के ये अनूठे अंदाज राहगीरों और स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। कांवड़ मार्ग पर कदम-कदम पर शिवभक्ति का ऐसा रंग दिखाई दे रहा है, मानो पूरा मार्ग स्वयं कैलाश धाम में बदल गया हो।

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