गाजियाबाद में साइबर ठगों का खौफ, शेयर ट्रेडिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लूट लिए करोड़ों रुपये
गाजियाबाद में फरवरी 2024 से साइबर क्राइम थाना खुलने के बाद शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है, जिसमें 386 लोगों ने 143.91 करोड़ रुपये गंवाए हैं।

शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले सावधान (AI-Generated Image)
HighLights
फरवरी 2024 से गाजियाबाद में 143.91 करोड़ की शेयर ट्रेडिंग ठगी।
औसतन हर व्यक्ति ने शेयर ट्रेडिंग में 37 लाख रुपये गंवाए।
कुल ठगी गई रकम का केवल 19% ही वापस मिल पाया।
विनीत कुमार, गाजियाबाद। शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच गाढ़ी कमाई पर बड़ी चोट कर रहा है। फरवरी 2024 से साइबर क्राइम थाना खुलने के बाद सभी तरह के साइबर अपराध में शेयर ट्रेडिंग में 386 लोगों ने सबसे ज्यादा रकम 143.91 करोड़ रुपये भी गवाएं और औसतन हर व्यक्ति से 37 लाख रुपये की ठगी हुई है।
रकम वापसी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शेयर ट्रेडिंग में सिर्फ 86 हजार रुपये ही औसतन हर व्यक्ति को वापस हो पाए हैं। पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में कई माह या कई दिन रुपये लगाने के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास होता है। ऐसे में ठग पूरी रकम को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर चुके होते हैं।
फरवरी 2024 में 825 मुकदमे दर्ज
फरवरी 2024 में साइबर क्राइम थाना शुरू होने के बाद से बीते महीने तक 825 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें कुल 223.21 करोड़ रुपये की रकम ठगी गई है। इसके मुकाबले पीड़ितों को केवल 42.93 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके हैं। यानी ठगी गई रकम का करीब पांचवां हिस्सा ही वापस हो पाया है। ठगी के तरीकों में शेयर ट्रेडिंग सबसे आगे है।
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 386 मुकदमे दर्ज हुए और करीब 143.91 करोड़ रुपये ठगे गए। यह कुल ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भी लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इस तरह की ठगी के 55 मुकदमों में करीब 23.42 करोड़ रुपये गंवाए गए।
ठगी की रकम वापसी भी चुनौती
ठगी की रकम वापस कराने की चुनौती भी बनी हुई है। अब तक कुल ठगी की रकम का करीब 19 प्रतिशत ही वापस हो सका है। ऐसे में लोगों को अनजान निवेश योजनाओं, संदेशों और फोन काल से सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी दबाव या लालच में आकर रुपये ट्रांसफर करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।

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सावधानी बरतें, तभी ठगी से बचेंगे
- शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे के लालच से बचें
- डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों के झांसे में न आएं, कोई भी जांच एजेंसी वीडियो काल पर जांच नहीं करती
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध एप डाउनलोड न करें।
- ओटीपी, बैंक पासवर्ड, एटीएम पिन और सीवीवी किसी से साझा न करें
- अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन साझा करने वाला एप डाउनलोड न करें।
- ठगी होने पर तुरंत 1930 पर काल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं
साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश है। ठगी की रकम वापसी में बढ़ाेतरी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक 110 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई हैं जबकि 52 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
बलवंत कुमार चौधरी, डीसीपी मुख्यालय
