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जिस रावण के पुतले से चलता था परिवार, उसी ने छीनी जिंदगी; हापुड़ में 5 बेटों के सिर से उठा पिता का साया

Published: Tue, 06 Oct 2026 11:39 AM (IST)

साहिबाबाद में रावण के पुतले में पटाखे भरते समय हुए भीषण धमाके में पुतला बनाने वाले कारीगर अनिल गंभीर रूप ...और पढ़ें

परिवार में छाया मातम और मृतक अनिल की फाइल फोटो। जागरण

परिवार में छाया मातम और मृतक अनिल की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. साहिबाबाद में रावण के पुतले में पटाखे भरते समय धमाका हुआ।

  2. पुतला बनाने वाले कारीगर अनिल की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।

  3. अनिल के दो बेटों सहित छह कारीगर हादसे में घायल हुए।

केशव त्यागी, हापुड़। पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले पिलखुवा के रमपुरा के अनिल के लिए इस बार यही पुश्तैनी काम जिंदगी पर भारी पड़ गया।

साहिबाबाद के लाजपत नगर में सोमवार सुबह रावण के पुतले में पटाखे भरते समय हुए भीषण धमाके में 50 वर्षीय अनिल पुत्र जगदीश घायल हो गए थे। जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

हादसे में उनके दो बेटे रिषभ और रानू समेत चार अन्य कारीगर घायल हो गए। हादसे की खबर रमपुरा पहुंची तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। अनिल को रामलीला के लिए रावण और कुंभकर्ण के पुतले तैयार करने का काम मिला था।

पटाखा भरते वक्त साहिबाबाद में हुआ हादसा

वह अपने परिवार और अन्य कारीगरों के साथ साहिबाबाद में पुतले तैयार कर रहा था। सोमवार सुबह रावण के पुतले में दहन के लिए पटाखे भरे जा रहे थे। इसी दौरान अचानक आग लग गई और देखते ही देखते तेज धमाका हो गया।

धमाके से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया गया कि धमाके के स्थान से कुछ दूरी पर अनिल बैठा था। वह लोहे के गेट के नीचे दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

हादसे में अनिल के बेटे ऋषभ (25 वर्षीय) और रानू (22 वर्षीय) भी घायल हुए हैं। इसके अलावा रमपुरा के कामगार महेंद्र पुत्र रामसिंह (48 वर्षीय) और राजू पुत्र दयाचंद (32 वर्षीय) समेत अन्य कारीगर घायल हुए हैं। सभी सामान्य तौर पर पुतला बनाने का काम करते हैं।

पांच बेटों को छोड़ गए अनिल

अनिल की पत्नी सीमा (46) गृहिणी हैं। उसके पांच बेटे लक्की, पंकज, लव, रिषभ और रानू हैं। सभी बेटे पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे अनिल की अचानक मौत से पत्नी और बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस काम को परिवार ने पीढ़ियों से अपनी रोजी-रोटी का जरिया बनाया, उसी काम के दौरान अनिल की जान चली गई।

पुश्तैनी हुनर ने परिवार को दिया रोजगार

रमपुरा में अनिल का परिवार लंबे समय से रावण के पुतले बनाने का काम करता आ रहा है। दशहरा नजदीक आते ही परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर जाकर पुतले तैयार करते थे। इस बार भी साहिबाबाद में काम मिला था। पुतलों का ढांचा तैयार करने के बाद उसमें दहन के लिए पटाखे भरे जा रहे थे। इसी दौरान हादसा हो गया।

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