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गाजियाबाद में GRAP-1 बेअसर: 13 हॉटस्पॉट पर उड़ रही धूल, वेव सिटी की हवा जहरीली

Published: Thu, 22 Oct 2026 09:54 AM (IST)

ग्रेप के पहले चरण की पाबंदियां लागू होने के बावजूद गाजियाबाद में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय नदारद दिखे। सड़कों पर ...और पढ़ें

बुधवार को एक्यूआइ 223 दर्ज किया गया

बुधवार को एक्यूआइ 223 दर्ज किया गया

HighLights

  1. गाजियाबाद में ग्रेप के पहले चरण की पाबंदियां लागू।

  2. सड़कों पर धूल और कूड़ा जलने से प्रदूषण जारी।

  3. जिले का एक्यूआइ 223, हॉटस्पॉट में भी लापरवाही।

जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। एनसीआर में ग्रेप (ग्रेडेड रेंस्पांस एक्शन प्लान) के पहले चरण की पाबंदियां लागू हो गई हैं। इसके बाद भी प्रदूषण रोकथाम के इंतजाम दूर तक दिखाई नहीं दिए। कहीं सड़कों पर धूल का गुबार उड़ता रहा तो कहीं जलता कूड़ा हवा में जहर घोलता रहा। बुधवार को जिले का एक्यूआइ 223 दर्ज किया गया।

जिले में करीब 20 विभागों को प्रदूषण रोकथाम की जिम्मेदारी दी गई हैं। इसमें नगर निगम, जीडीए, आवास विकास, पीडब्ल्यूडी, नगर पालिका, पुलिस विभाग आदि शामिल हैं। जो क्षेत्र जिस विभाग द्वारा बसाया गया है उसे उस क्षेत्र में विशेष रूप से कार्रवाई करनी है।

13 हॉटस्पाट भी चिह्नित किए गए 

इसके लिए 13 हॉटस्पाट भी चिह्नित किए गए हैं। स्थिति ये है कि इन क्षेत्रों में भी प्रदूषण रोकथाम के लिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। बुधवार को दिनभर सड़कों पर धूल उड़ती रही। दूर तक भी पानी का छिड़काव या फिर धूल रोकने के अन्य इंतजाम दिखाई नहीं दिए।

हर कोई कागजों में खानापूरी करके पल्ला झाड़ रहा हैै। जबकि इन इलाकों में धूल को रोकना के लिए रोजाना मशीनों से सफाई करने के साथ ही पानी का छिड़काव करना, कूड़ा जलने से रोकना, फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं को रोकना, यातायात सामान्य रखना, उम्र पूरी कर चुके वाहनों को सील करना, अवैध फैक्ट्रियों पर कार्रवाई आदि शामिल है।

इन क्षेत्रों को हॉटस्पाट में किया गया है शामिल

जिले में प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके इसके लिए 13 हाटस्पाट (सबसे प्रदूषित इलाके) चिह्नित किए गए हैं। इसमें साहिबाबाद, मोहननगर, राजनगर एक्सटेंसन, लोनी, भोपुरा-लोनी बार्डर, सिद्धार्थ विहार, कनावनी पुस्ता रोड, विजयनगर, साउथ साइट जीडी रोड, लालकुआं, इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली शामिल हैं।

ये हॉटस्पाट इसीलिए चिह्नित किए थे कि यहां योजनाबद्ध तरीके से प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके, कोई भी विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है। सभी दावे हवा-हवाई हैं।

वेव सिटी की हवा सबसे खराब

जिले में सबसे अधिक एक्यूआइ 277 वेव सिटी का दर्ज किया गया। इसके अलावा इंदिरापुरम, लोनी, वेद विहार व संजय नगर की हवा भी खराब श्रेणी में दर्ज की गई। केवल गोविंदपुरम के लोगों को राहत रही। यहां की हवा संतोषजनक श्रेणी में रही।

ग्रेप के पहले चरण की पाबंदियां

-निर्माण कार्यों और ध्वस्तीकरण से उड़ने वाली धूल को रोकना।
-कूड़ा-कचरा को जलाने पर रोक।
-सड़कों पर उड़ती धूल को रोकना।
-ढाबा, रेस्टोरेंट आदि पर कोयला जलाने पर रोक।

हाटस्पाट वाले क्षेत्रों में प्रदूषण के ये हैं मुख्य कारण

-सड़कों पर उड़ती धूल।
-वाहनों का दबाव।
-निर्माण व ध्वस्तीकरण।
-गतिविधिकच्ची सड़कें।
-औद्योगिक उत्सर्जन।
-अवैध औद्योगिक क्षेत्र
-खुले में पड़ी निर्माण सामग्री।

बुधवार को स्टेशनों का AQI

वेव सिटी -277
वेद विहार -211
संजय नगर -268
लोनी -255
इंदिरापुरम -269
गोविंदपुरम -57

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बीते वर्षों में इन बिंदुओं पर काम करने का दावा

-अधिक प्रदूषण वाले इलाकों को चिह्नित कर कार्रवाई।
-अवैध औद्योगिक क्षेत्रों को सील करना।
-सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए छिड़काव।
-इलेक्ट्रानिक वाहनों के प्रति जागरूकता।
-ट्रैफिक सिग्नलों की मरम्मत से यातायात व्यवस्थित।
-वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कार्रवाई।
-निर्माण कार्य के मलबे का सही निस्तारण।

पिछले पांच साल में अधिकतम प्रदूषण की स्थिति:

वर्ष एक्यूआइ

2020 -484
2021 -485
2022 -487
2023 -478
2024 -467
2025 -459

वर्जन-

'प्रदूषण रोकने के लिए कार्रवाई जारी है। निगरानी के लिए विशेष टीम भी सक्रिय हो गई हैं। ग्रेप के नियमों का पालन नहीं करने वालों पर बृहस्पतिवार से कार्रवाई शुरू की जाएगी।'

-अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।