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CAQM के आदेश की धज्जियां, गाजियाबाद में दौड़ रहीं 300 से अधिक खटारा बसें; तीन साल बाद भी नहीं बदलीं

Published: Wed, 16 Sep 2026 07:26 PM (IST)

गाजियाबाद में अक्टूबर से प्रदूषण बढ़ने की आशंका है, क्योंकि यूपीएसआरटीसी ने सीएक्यूएम के आदेश के बावजूद 300 से अधिक पुरानी बीएस-3 और बीएस-4 बसों को नहीं बदला है।

कौशांबी बस अड्डे पर खड़ी बसें। जागरण

कौशांबी बस अड्डे पर खड़ी बसें। जागरण

HighLights

  1. 300 से अधिक पुरानी बीएस-3 और बीएस-4 बसें नहीं बदलीं।

  2. सीएक्यूएम के तीन साल पुराने आदेशों की अनदेखी जारी।

  3. अक्टूबर में प्रदूषण बढ़ने पर एनसीआर में पाबंदियां लगेंगी।

जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। अक्टूबर में सर्दी शुरू होने के साथ ही प्रदूषण का वार फिर से शुरू हो जाएगा। हालांकि गाजियाबाद के लोगों को वर्षभर ही साफ हवा नहीं मिल पाती।

फिर भी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के आदेश के तीन वर्ष बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने गाजियाबाद रीजन में अभी तक 300 से अधिक बीएस-तीन व चार बसों को नहीं बदल सका।

एनसीआर में प्रतिबंध के बाद भी इनमें से ज्यादातर बसों का संचालन किया जा रहा है, जिससे इन बसों से प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है।

सीएक्यूएम ने एनसीआर में प्रदूषण का बड़ा कारण पुराने वाहनों के संचालन को भी माना था। इनमें रोडवेज की बीएस-3 व 4 बसें भी शामिल हैं। इसकी रोकथाम के लिए आयोग ने बसों को बंद करने के लिए परिवहन निगम के अधिकारियों के साथ अक्टूबर 2023 में बैठक की थी।

इस साल भी बसों को नहीं बदला जा सका

इन बसों को एनसीआर में बंद करने का फैसला लिया गया था। इनके स्थान पर बीएस-छह, सीएनजी व इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना था, लेकिन परिवहन निगम के अधिकारियों ने सीएक्यूएम से अनुमति लेकर वर्ष 2024 में बसों का संचालन गया था।

इसके बाद वर्ष 2025 में सर्दी के दौरान प्रदूषण बढ़ने पर बसों पर रोक लगी तो रूट बदल दिए, लेकिन इस साल भी बसों को नहीं बदला जा सका।

अक्टूबर शुरू होने के साथ ही प्रदूषण बढ़ना शुरू हो जाएगा और ग्रेप की पाबंदियां लगनी शुरू हो जाएंगी। इससे इन बसों का संचालन एनसीआर में पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा।

अधिकारियों का कहना है कि परिवहन निगम को डिमांड भेजी गई है। ग्रेप लागू होने पर बसों का रूट बदल दिया जाएगा। एनसीआर के बाहर के रूटों पर ही संचालन किया जाएगा।

दो वर्ष में करीब 210 बसें आईं

तीन वर्ष पहले परिवहन निगम के बेड़े में करीब 500 बीएस-तीन व चार बसें थीं। बीते करीब दो वर्ष में 210 बसों को बदला गया है। इनके स्थान पर बीएस-छह बसों को शामिल किया गया है। इनमें से बड़ी संख्या में बसों को नीलाम किया जा चुका है। बची हुई बसों को भी नीलाम किया जाएगा।

दिल्ली में प्रवेश आठ नवंबर 2023 को लग चुकी है रोक

बीएस-3 व 4 बसों के संचालन पर आठ नवंबर 2023 को ही रोक लग चुकी है। वहां केवल बीएस-6 बसों को भेजा जा रहा है, जो बसें दिल्ली के आनंद विहार से संचालित होती थीं उन बसों को कौशांबी डिपो शिफ्ट कर दिया गया था। यहीं से इन बसों का संचालन किया जा रहा है।

बीएस-6 बसों से प्रदूषण होता है कम

बीएस (भारत स्टेज) प्रदूषण मापक पैमाना है। इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। ये वाहनों से उत्सर्जित होने वाले कार्बन का पर्यावरण और लोगों के सेहत पर पड़ रहा असर जांचता है और उसके अनुसार वाहन के स्तर को निर्धारित करता है। बीएस नंबर वाहनों के इंजन का प्रदूषण नियंत्रण का स्तर बताता है। यानी जितना बड़ा नंबर उतना कम प्रदूषण।

बीएस-तीन व चार बसों के स्थान पर मुख्यालय से लगातार बीएस-छह बसें आ रही हैं। करीब 200 से अधिक बसें बदली जा चुकी हैं, जो बसें बची हुई हैं उन्हें भी मुख्यालय स्तर से बदलने की प्रक्रिया जारी है।
-केसरी नंदन चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीएसआरटीसी।