22 फर्जी पासपोर्ट केस में पुलिस की जांच रफ्तार लचर, एक महीने में सिर्फ एक आरोपी पकड़ा
गाजियाबाद के भोजपुर में 22 फर्जी पासपोर्ट मामले में एफआईआर के एक महीने बाद भी पुलिस की जांच धीमी है। ...और पढ़ें

भोजपुर में फर्जी पतों पर जारी हुए 22 पासपोर्ट वाले मामले का पर्दाफाश होने और एफआईआर को पूरा एक महीना हो गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विनीत कुमार, गाजियाबाद। भोजपुर में फर्जी पतों पर जारी हुए 22 पासपोर्ट वाले मामले का पर्दाफाश होने और एफआईआर को पूरा एक महीना हो गया है। पुलिस एक महीने की जांच में पासपोर्ट हासिल करने वाले 22 लोगों में सिर्फ एक आरोपित ही गिरफ्तार कर पाई है जबकि पासपोर्ट बनवाने वालों के अलावा कई अन्य आरोपित हैं जाे इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल रहे हैं। पुलिस इन आरोपितों में से किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
एक पते पर पांच साल रहने का नियम
पासपोर्ट फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद से पुलिस ने जांच शुरू की। बुधवार को ही पुलिस ने जिन 22 लोगों के पासपोर्ट जारी हुए उसमें 15 साल पहले पाकिस्तान से आए सिख हजमीत उर्फ रजमीत को गिरफ्तार किया। हजमीत ने रजमीत नाम से पासपोर्ट बनवाया। जांच में सामने आया है कि उसे बीते वर्ष की भारत की नागिरकता मिली है। पासपोर्ट बनवाने के लिए एक पते पर पांच साल रहने का नियम है।
नौकरी के लिए दुबई जाने की बात बताई
आरोपित ने पुलिस को बताया कि इसी नियम के कारण वह अपना पासपोर्ट नहीं बनवा पाया क्योंकि 15 साल में वह किराए पर अलग-अलग जगह रहा। पुलिस का कहना है कि हजमीत ने नौकरी के लिए दुबई जाने की बात बताई है। इस मामले में हजमीत समेत उसके चार अन्य स्वजन का पता चल गया है जिनके पासपोर्ट जारी हुए। पुलिस अब बाकी 17 आरोपितों का पता लगा रही है जिनके पासपोर्ट जारी हुए हैं।
फर्जीवाड़े में अभी तक हुई गिरफ्तारी
पोस्टमैन अरुण कुमार, एजेंट विवेक गांधी, प्रकाश सुब्बा, सातवंत कौर, अमनदीप सिंह, पासपोर्ट विभाग के क्लर्क पुष्पेंद्र, पोस्टमैन प्रांशु मिश्रा उर्फ अभिषेक और पासपोर्ट बनवाने वाले दिल्ली के करोलबाग निवासी हजमीत सिंह उर्फ रजमीत गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
रजमीत से पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि उसने दिल्ली के मुस्ताक अहमद को पासपोर्ट बनवाने का काम दिया था। मुस्ताक ही पुलिस की जांच में पूरे मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। उसने ही आवेदकों और एजेंट के बीच सेतु का काम किया।
जिनकी जांच पर पासपोर्ट जारी वे 'मुक्त'
पूरे मामले में जिन पुलिसकर्मियों की जांच पर पासपोर्ट जारी किए गए उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत आठ दारोगा और एक सिपहाी को लाइन हाजिर किया है जबकि पुलिस द्वारा बताए गए तत्कालीन थाना मुंशी दीपक कुमार को निलंबित किया गया। दीपक एक महीने से ज्यादा समय से फरार है। अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
"मामले में क्राइम ब्रांच की टीम लगातार आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है। फरार सिपाही का नाम मुकदमे के आरोपितों में शामिल किया जा चुका है। उसकी भी तलाश की जा रही है।"
-अमित सक्सेना, एसीपी क्राइम
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