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सिलिंडर नहीं तो अब छोले-भटूरे भी नहीं, मेन्यू से पसंदीदा डिशेज हुईं आउट; दाल-नान से काम चला रहे लोग

Published: Fri, 13 Mar 2026 01:36 PM (IST)Updated: Fri, 13 Mar 2026 01:58 PM (IST)

गाजियाबाद में पश्चिम एशिया में छिड़े महासंग्राम के कारण कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति रुक गई है। इससे छोले-भटूरे जैसे पकवान बनाने वाले दुकानदारों को मेन्यू बदलना पड़ा है।

HighLights

  1. गाजियाबाद में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति रुकी।

  2. छोले-भटूरे विक्रेता अब दाल-नान, दाल-चावल बेच रहे।

  3. शहर के 2000 से अधिक विक्रेता मेन्यू बदल रहे।

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। पश्चिम एशिया में छिड़े महासंग्राम का असर जिले में दिख रहा है। कामर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति पर रोक लगा दी गयी है, ऐसे में दुकानदारों ने खाने के मेन्यू में बदलाव कर दिया है। अब ठेलियों पर छोले-भटूरे की जगह दाल-नान की बिक्री की जा रही है।

राजनगर में पिछले 18 साल से ठेली पर छोले भटूरे की बिक्री करने वाले चंदू मूलरूप से बस्ती के रहने वाले हैं। उनकी दुकान पर शुक्रवार को रोजाना की तरह ग्राहक छोले-भटूरे खाने पहुंचे तो पता चला कि मेन्यू में बदलाव है।

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छोले-भटूरे की जगह दाल-चावल और नान खाने के लिए उपलब्ध है। इसकी वजह पूछने पर बताया कि कामर्शियल सिलिंडर नही मिल रहा है। भटूरे बनाने के लिए गैस सिलिंडर होना जरूरी है।

अब वह घर से ही दाल, चावल, सब्जी बनाकर लाते हैं दुकान पर तंदूर लगा है, जिसमें तंदूरी रोटी और नान बना सकते हैं। दाल, सब्जी को गर्म भी कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने देश मे एलपीजी संकट की स्थिति में अपनी कमाई जारी रखने और ग्राहकों को भोजन मुहैया कराने के लिए यह तरीका अपनाया है।

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चंदू अकेले ऐसे दुकानदार नहीं हैं, जिन्होंने यह बदलाव किया है। उनकी तरह शहर में दो हजार से अधिक छोले-भटूरे की बिक्री करने वाले दुकानदार हैं और वह अब खाने के मेन्यू में इस तरह का बदलाव कामर्शियल सिलिंडर न मिलने पर कर रहे हैं। दुकानदारों की मांग है कि सरकार को कामर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति जल्द शुरू करनी चाहिए।

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