45 लाख लोगों की सांसों पर खतरा, जानिए क्यों इस साल सिर्फ 4 दिन ही नसीब हो सकी साफ हवा
गाजियाबाद में प्रदूषण नियंत्रण के दावों के बावजूद, इस साल साढ़े आठ महीने में सिर्फ चार दिन ही साफ हवा ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड
HighLights
इस साल साढ़े आठ माह में सिर्फ चार दिन साफ हवा मिली।
पिछले छह वर्षों में शहरवासियों को केवल 66 दिन स्वच्छ हवा नसीब।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए 20 से अधिक विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
प्रदूषण रोकथाम के लिए अधिकारी साल दर साल दावे करते रहते हैं, फिर भी 45 लाख शहरवासियों की सांसों पर प्रदूषण का प्रहार नहीं रुक रहा है। इस वर्ष भी अभी तक करीब साढ़े आठ माह में महज चार दिन ही साफ हवा मिल सकी। बाकी दिन संतोषजनक, मध्यम, खराब, बेहद खराब व गंभीर श्रेणी में रहना पड़ा।
हर वर्ष ज्यादातर दिन यही स्थिति रही। वर्ष 2025 में भी महज छह दिन ही साफ हवा मिल सकी थी। बीते करीब छह वर्ष की बात करें तो 66 दिन ही लोग साफ हवा में सांस ले सके। अधिकारी हर बार केवल कागजी योजनाएं तैयार करते रहे और लोगों की उम्मीद पर पानी फेरते रहे। पेश है साहिबाबाद से राहुल कुमार की रिपोर्ट...
वर्ष 2026 में कितने दिन किस श्रेणी में रही हवा
- श्रेणी दिन
- अच्छी 04
- संतोषजनक 49
- मध्यम 103
- खराब 80
- बेहद खराब 29
- गंभीर 02
इस वर्ष कब-कब मिली साफ हवा :
- दिनांक एक्यूआइ
- आठ जुलाई 49
- नौ जुलाई 50
- 22 जुलाई 45
- छह सितंबर 48
बीते छह वर्ष में कितने दिन साफ व गंभीर श्रेणी में रही हवा
वर्ष साफ गंभीर
2020 -13 -24
2021 -10 -22
2022 -12 -02
2023 -10 -03
2024 -15 -03
2025 -06 -14
बीते छह साल में अधिकतम प्रदूषण की स्थिति
वर्ष एक्यूआइ
2020 484
2021 485
2022 487
2023 478
2024 467
2025 459
छह वर्ष में सील की गईं अवैध फैक्ट्रियां
वर्ष सील फैक्ट्री
2020 180
2021 353
2022 380
2023 308
2024 294
2025 307
2026 372
एक्यूआइ के आधार पर हवा की श्रेणी
श्रेणी एक्यूआइ
अच्छी 0 से 50
संतोषजनक 51 से 100
मध्यम 101 से 200
खराब 201 से 300
बेहद खराब 301 से 400
गंभीर 401 से ऊपर
इन बिंदुओं पर कार्य करने की जरूरत
- टूटी सड़कों की मरम्मत होने से मिलेगी बड़ी राहत।
- अधिक धूल वाले इलाकों में पानी का छिड़काव हो।
- शहर में जाम की समस्या को दूर किया जाए।
- उम्र पूरी कर चुके वाहनों को सील किया जाए।
- अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में प्रदूषण के कारकों पर रोक लगे।
- अवैध फैक्ट्रियां सील हों, नई अवैध फैक्टरी न खुलें।
- सभी फैक्ट्रियों में नियम के अनुसार चिमनी लगें।
- लोनी जैसे अधिक प्रदूषित इलाके में ई-वेस्ट जलाने पर रोक लगे।
प्रदूषण रोकथाम की जिम्मेदारी 20 से अधिक विभागों को मिली हुई है। प्रदूषण बोर्ड निगरानी व कार्रवाई का कार्य करता है। इस वर्ष और बेहतर तरीके से कार्य किया जाएगा।
-अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
