गाजियाबाद में बनेंगे तीन नए बिजलीघर, 30 करोड़ से मजबूत होगा औद्योगिक क्षेत्रों का बिजली ढांचा
गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए यूपीसीडा ने 30 करोड़ रुपये की लागत से तीन नए बिजलीघरों के निर्माण को मंजूरी दी है।

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HighLights
यूपीसीडा ने गाजियाबाद में तीन नए बिजलीघरों को मंजूरी दी।
20-20 एमवीए क्षमता के बिजलीघर 30 करोड़ रुपये में बनेंगे।
औद्योगिक क्षेत्रों को निर्बाध और पर्याप्त बिजली आपूर्ति मिलेगी।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए यूपीसीडा की ओर से तीन नए बिजलीघरों के निर्माण की कार्ययोजना को शासन से मंजूरी मिल गई है। कविनगर, साहिबाबाद साइट-फोर और मसूरी-गुलावठी औद्योगिक क्षेत्र में 20-20 एमवीए क्षमता के बिजलीघरों तैयार होंगे। इनके निर्माण पर करीब 30 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इन बिजलीघरों के निर्माण के बाद तीनों औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित हजारों इकाइयों को निर्बाध और पर्याप्त बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है। जिले के 11 औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिदिन करीब साढ़े चार सौ मेगावाट बिजली की खपत होती है।
लगातार बढ़ रही है इकाइयों का क्षमता
औद्योगिक इकाइयों की क्षमता लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए नए बिजलीघरों की जरूरत महसूस की गई है। आने वाले दिनों में बिजली की मांग और बढ़ने की संभावना है। ओवरहेड के साथ भूमिगत लाइन भी नए बिजलीघरों के निर्माण के साथ बिजली आपूर्ति के लिए नई लाइनें भी बिछाई जाएंगी। जरूरत के अनुसार कहीं ओवरहेड तो कहीं भूमिगत केबल डाली जाएगी।
नए बिजलीघरों के निर्माण का प्रस्ताव अटल मिशन के तहत कानपुर मुख्यालय भेजा गया था, जहां से मंजूरी मिल गई है। कार्ययोजना स्वीकृत होने के बाद इसी माह निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
निर्माण पूरा होने के बाद बिजलीघरों को ऊर्जा निगम को हैंडओवर कर दिया जाएगा। जिले के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी बिजली ढांचे को मजबूत करने के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। 20-20 एमवीए क्षमता के तीन नए बिजलीघर बनने से औद्योगिक इकाइयों को अतिरिक्त बिजली आपूर्ति मिलेगी और बढ़ती मांग के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
उद्यमी काफी समय से विद्युत व्यवस्था में और बेहतर सुधार की मांग करते आ रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में बिजलीघरों के निर्माण से निश्चित रूप से उद्योगों को लाभ मिलेगा। विद्युत व्यवस्था में सुधार के साथ ही उत्पादन भी बढ़ेगा।
