गाजियाबाद में 2.99 लाख विद्यार्थियों की तैयार नहीं हो सकी अपार आईडी, अब कार्रवाई की तैयारी
गाजियाबाद में करीब 2.99 लाख विद्यार्थियों के पास अभी तक अपार आइडी नहीं है, जो कुल छात्रों का 38% है। ...और पढ़ें

जिले में करीब 38 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास अपार आईडी नहीं है।
HighLights
गाजियाबाद में 2.99 लाख विद्यार्थियों की अपार आइडी नहीं बनी।
स्कूलों की लापरवाही के कारण प्रदेश रैंकिंग में जिला पिछड़ा।
विभाग ने लापरवाह स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी की।
दीपा शर्मा, गाजियाबाद। जिले में तीन लाख विद्यार्थी अपनी डिजिटल पहचान अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी से वंचित हैं। जिले में करीब 38 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह स्कूलों की लापरवाही है।
विभाग के बार बार नोटिस व चेतावनी के बाद भी स्कूल अपनी मनमानी से पीछे नहीं हट रहे हैं। स्कूलों की लापरवाही के चलते प्रदेश रैंकिंग में जिले की स्थिति निचले पायदान पर रही है। अब विभाग की ओर से लापरवाही करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी है।
अपार आईडी जिसमें विद्यार्थियों के सभी शैक्षणिक रिकार्ड (जैसे अंक, पुरस्कार, उपलब्धियां) एक ही जगह सुरक्षित रहते हैं। यह आधार से लिंक होने के साथ डिजिलाकर के साथ एकीकृत है। सभी विद्यालयों के लिए सभी विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट करना अनिवार्य है।
कब हुई थी अपार आईडी की शुरुआत?
सितंबर 2024 में अपार आईडी की शुरुआत हुई थी, लेकिन अगस्त 2026 तक जिले में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं जो अपार आईडी जनरेट करने में लापरवाही बरत रहे हैं। जिससे आने वाले समय में विद्यार्थियों के सामने करियर संबंधी बड़ी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
अपार आईडी अब कई प्रवेश परीक्षाओं एवं अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए अनिवार्य कर दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सभी सरकारी सेवाओं के लिए अपार आईडी अनिवार्य होगी।
यह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत ''वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी'''' पहल का हिस्सा है। हालांकि सरकारी स्कूल अपार आईडी जनरेट करने में अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूल डाटा अपलोड करने और आईडी जनरेट करने में लापरवाही बरत रहे हैं।
कैसे जनरेट होती है अपार आईडी?
अपार आईडी जनरेट करने के लिए यू डायस पोर्टल पर डाटा अपलोड करना होता है। आधार कार्ड एवं विद्यार्थी के अन्य विवरण का डेटा यू डायस पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। पोर्टल पर विद्यार्थी की प्रोफाइल कंप्लीट करने के बाद विद्यार्थी का पेन नंबर जारी होता है। पेन नंबर जारी होने के बाद अपार आईडी जनरेट करने के लिए लिंक मिलता है। अभिभावकों की सहमति के बाद विद्यार्थी की अपार आईडी जनरेट की जाती है।
स्कूलों के साथ की जा रही बैठक, करीब 300 को जारी किए नोटिस
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लगातार ऐसे स्कूलों के साथ बैठक की गई। बैठक में जो समस्याएं सामने आईं उनका समाधान भी कराया गया। इसके बावजूद स्कूलों द्वारा काम नहीं किया गया।
करीब 300 स्कूलों को कई बार कार्रवाई की चेतावनी देते हुए नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन अब विभाग द्वारा जिन विद्यालयों में 500 से अधिक विद्यार्थियों का काम पेंडिंग है उनको निर्धारित समय में काम पूरा करने के निर्देश के साथ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
कहां आ रही है समस्या?
सरकारी स्कूलों में डाटा अपलोड करने की स्थिति जिले में अच्छी है, लेकिन ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों द्वारा डाटा अपलोड करने और आईडी जनरेट करने का काम नहीं किया गया है। स्कूलों का कहना होता है कि विद्यार्थियों का डाटा मिस मेच होने की वजह से ही उनकी आईडी जनरेट नहीं हो पा रही है। इसमें नाम और अभिभावकों के नाम की स्पेलिंग आदि हैं।
आधार कार्ड न होना और डुप्लीकेशी (दो स्कूलों में नामांकन की स्थिति) भी एक बड़ी समस्या है। बच्चों का आधार कार्ड न होना। इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों में अभिभावकों द्वारा सहमति न देने की भी समस्या सामने आ रही है।
- जिले में कुल स्कूल - 2,735
- जिले में कुल विद्यार्थी - 7,82,422
- जिले में अपार आईडी से वंचित कुल विद्यार्थी - 2,99,142
- जिले में शून्य अपार आईडी जनरेट करने वाले विद्यालय - 282
प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में 27वें नंबर पर रहा गाजियाबाद
हाल ही में अपार आईडी को लेकर जारी की गई प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में गाजियाबाद 27वें स्थान पर रहा। वहीं कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की अपार आईडी को लेकर प्रदेश स्तर पर जिले का स्थान बाटम-तीन में पहुंच गया।
अपार आईडी जनरेट न करने वाले स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। स्कूलों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी जा रही हैं और समाधान करते हुए आईडी जनरेट करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है। जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं हैं उनके आधार कार्ड बनवानें, अभिभावकों की काउंसिलिंग करने और मिस मैच संबंधी समस्या का विभाग में निस्तारण कराने के लिए कहा गया है। सभी स्कूलों के लिए अपार आईडी जनरेट करना अनिवार्य है, अन्यथा की स्थिति में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
