Gen-Z नहीं Gen-T: मेरठ से युवाओं के लिए बड़ी पहल, अनुज शर्मा बोले- कॉकरोच नहीं, टाइगर बनें
युवाओं को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और उद्यमी बनाने के लिए 'जेन-टी' (टेक्नो टाइगर) अभियान शुरू किया ...और पढ़ें
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स्वावलंबी भारत अभियान के मेरठ प्रांत सह समन्वयक एमबीए अनुज शर्मा। जागरण
HighLights
युवाओं को तकनीक का निर्माता और उद्यमी बनाने का नया अभियान।
आत्मनिर्भरता, नवाचार और भारतीय सोच को आधुनिक तकनीक से जोड़ना।
नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार के अवसर पैदा करने की सोच।
शाहनवाज अली, गाजियाबाद। जेनरेशन जी के दौर में युवाओं के लिए अब एक नई पहचान गढ़ने की कोशिश शुरू हुई है। ‘जेन टी’ यानी टेक्नो टाइगर। तकनीक की रफ्तार और टाइगर के तेवर को जोड़कर तैयार किए गए इस विचार का मकसद युवाओं को केवल मोबाइल, इंटरनेट और एआई का उपभोक्ता बनाना नहीं, बल्कि तकनीक का निर्माता और रोजगार देने वाला बनाना है।
स्वावलंबी भारत अभियान के मेरठ प्रांत सह समन्वयक एमबीए अनुज शर्मा ने इस विचार को लेकर विधान पब्लिक स्कूल में छात्रों के बीच पहुंचकर इसकी शुरुआत की है, जिसमें उन्होंने तकनीक, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता पर संवाद किया।
अनुज शर्मा के अनुसार ‘टी’ का मतलब टेक्नोलॉजी भी है और टाइगर भी। टेक्नोलॉजी भारत की गति और क्षमता का प्रतीक है, जबकि टाइगर साहस, अनुशासन, एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता का। दोनों को जोड़कर युवाओं के सामने ऐसा विजन रखने की कोशिश है, जिसमें आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय सोच और अपनी जड़ों से जुड़ाव भी बना रहे।
छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का मुखिया शेर और देश का मुखिया बब्बर शेर हो, वहां के युवा जेन-जी कॉकोच नहीं, टेक्नो टाइगर हैं। उनका जोर युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाने पर है। नौकरी की तलाश से आगे बढ़कर रोजगार पैदा करने की सोच विकसित हो।

उपभोक्ता नहीं, तकनीक के बने निर्माता
जेन-टी अभियान में एआइ, कोडिंग, स्टार्टअप, अंतरिक्ष विज्ञान और नए तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं की रुचि बढ़ाने के साथ उन्हें नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने की तैयारी है। लक्ष्य है कि युवा नई तकनीक का इस्तेमाल केवल सुविधा और मनोरंजन के लिए न करें, बल्कि उससे नए समाधान और रोजगार के अवसर तैयार करें।
जेन-जी के बीच जेन-टी की दस्तक
युवाओं के बीच लोकप्रिय जेन-जी की पहचान को आगे बढ़ाते हुए जेन-टी को नई सोच की शब्दावली के रूप में स्थापित करने की कोशिश है। स्कूल-कालेजों में संवाद और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से युवाओं को तकनीकी क्षमता, साहस, अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति के प्रति जागरूक किया जाएगा।
गुरुकुल से अंतरिक्ष विज्ञान तक
अभियान की सोच केवल आधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा और भविष्य की तकनीक को साथ रखने पर जोर है।
गुरुकुल की परंपरा से लेकर एआई, कोडिंग, स्टार्टअप और अंतरिक्ष विज्ञान तक की यात्रा को उदाहरण बनाकर युवाओं में यह विश्वास पैदा करने की कोशिश है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भी दुनिया की अत्याधुनिक तकनीक में नेतृत्व किया जा सकता है।
जेन-टी अभियान के तीन लक्ष्य
- सोच में बदलाव : नौकरी तलाशने वाले युवाओं की जगह नौकरी देने और अवसर पैदा करने वाली सोच विकसित करना।
- तकनीक का रचनात्मक इस्तेमाल : मोबाइल और इंटरनेट के उपभोक्ता बनने के बजाय एआई, कोडिंग और तकनीक के निर्माता बनना।
- उपभोक्ता से आत्मनिर्भर भारत : युवाओं के नवाचार और उद्यमिता को आत्मनिर्भर भारत की ताकत से जोड़ना।
