जागरण संवाददाता, साहिबाबाद :

मंदिर में चढ़े फूल कचरे में फेंक दिए जाते हैं या फिर उन्हें जमीन में दबा दिया जाता है। लेकिन इंदिरापुरम की शिप्रा सनसिटी स्थित शिव मंदिर में देवी देवताओं को अर्पित किए गए फूल से बायो गैस प्लांट द्वारा खाद और गैस बनाई जा रही है। गैस का प्रयोग मंदिर में भोजन व प्रसाद बनाने में किया जाता है। वहीं, फूलों से तैयार हुई खाद पौधों में डाली जाती है। इससे पौधों को भी ताकत मिल रही है।

पहले मंदिर में चढ़ने वाले फूल मालाओं को जमीन में खोदकर दबा दिया जाता था या फिर नदी में प्रवाहित किया जाता था। ऐसा करना पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं था। इस समस्या का समाधान करने के लिए इंदिरापुरम की शिप्रा सनसिटी स्थित शिव मंदिर में दो साल पहले मंदिर समिति की ओर से बायो गैस प्लांट लगाया गया। अब भगवान मंदिर में भगवान को चढ़ाए गए फूल व मालाओं को रोजाना बायो प्लांट में डाल दिया जाता है। अब फूल मालाओं को कहीं फेंका या जमीन में नहीं दबाया जाता है। बायो प्लांट में डाले गए फूल 24 घंटे में खाद बन जाते हैं। इसके बाद मंदिर के पुजारी विनय मिश्रा या अन्य लोग इस खाद को निकालकर मंदिर परिसर व पार्क में लगे पौधों में डाल देते हैं। पौधों को खाद मिलने से वह तेजी से बढ़ते हैं और उन्हें ताकत भी मिलती है। खाद से बनती है गैस: मंदिर परिसर में लगाए गए बायो गैस प्लांट से खाद के साथ गैस भी बनती है। प्लांट से निकलने वाली गैस से मंदिर के पुजारी व अन्य कर्मचारी भोजन, प्रसाद व भगवान के लिए भोग तैयार करते हैं। प्लांट लगने के बाद से मंदिर में चढ़े फूलों से ही चूल्हा जलता है। गैस सिलेंडर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है। मंदिर में जितनी भी फूल मालाएं श्रद्धालु भगवान को अर्पित करते हैं। उन्हें मशीन में डाल दिया जाता है। 24 घंटे में खाद बन जाती है। खाद को पौधों में डाल दिया जाता है। जो गैस बनती है उससे प्रसाद और भगवान के लिए भोग बनाया जाता है।

- पं. विनय मिश्रा, पुजारी शिव मंदिर शिप्रा सनसिटी।

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