जागरण संवाददाता, गाजियबाद : 27 वर्ष पूर्व रेडियो बनाने से इंकार करने पर हमला करने वाले पांच अभियुक्तों को एससी एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मलखान सिंह ने दोषी करार दिया है। छह आरोपितों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। हमले के दौरान बुजुर्ग महिला की बंदूक से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कई लोग घायल हो गए थे। अदालत में बृहस्पतिवार को सजा पर बहस होगी।

वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी दयाशंकर राम त्रिपाठी ने बताया कि 15 जून 1992 को धौलाना के डहाना गांव में रात 11 बजे रेडियो मैकेनिक दलित किशनपाल के घर पर गांव के ही विनोद, बंटी व सतेंद्र पहुंचे और किशनपाल से कहा कि चलो रेडियो ठीक कर दो। किशनपाल ने कहा कि आज बहुत थक गया हूं, इस समय ठीक नहीं कर पाऊंगा। इसके बाद तीनों ने किशनपाल के साथ मारपीट की और चले गए। कुछ देर के बाद तीनों के साथ विजयपाल, राघवेंद्र, देवेंद्र, तारा, मिटू, टुकिया उर्फ टुक्की, गजेंद्र और भूपेंद्र लाइसेंसी बंदूक, तलवार, बल्लम, तमंचा और लाठी लेकर आए और गाली गलौज करते हुए हमला कर दिया। इसमें किशनपाल की 65 वर्षीय ताई चंदनिया की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि हमले में कमल सिंह, रामकिशन, रामभूल, गनेश, शीशराम, रोहताश, रतन सिंह, चंद्रपाल, कुंवर सिंह और रामवती गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावरों ने जाते हुए दलितों के बिटौरे में आग लगा दी। रात में रास्ता रोके जाने के डर से कोई थाने भी नहीं गया और दूसरे दिन सुबह रिपोर्ट दर्ज कराई। मुकदमे में सुनवाई के दौरान आरोपित विनोद, सतेंद्र, मिटू, गजेंद्र, राघवेंद्र व विजयपाल की मौत हो गई। जबकि अदालत ने देवेंद्र, भूपेंद्र, टुकिया, तारा, बंटी को दोषी करार दिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 13 गवाह पेश हुए, जबकि बचाव पक्ष की तरफ से एक भी गवाह पेश नहीं हुआ।

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Posted By: Jagran

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