जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : सोमवार को मुकद्दस रमजान-उल-मुबारक का चांद नजर आने के साथ ही मस्जिदों में इबादत के लिए लोगों की चहल-पहल बढ़ गई। इस माह अल्लाह ताला अपने बंदों को खास रहमतें और बरकतें अता करता है। इस मुबारक महीने में मुसलमान दिन-रात अल्लाह ही इबादत में जुटे रहते हैं। रोजा इंसान को तमाम बुराइयों से बचने की सीख देता है। मस्जिदों में रात में नमाज-ए तरावीह में कलाम पाक की तिलावत की गई।

रमजान-उल-मुबारक का पवित्र माह शुरू होते ही अकीदतमंद अल्लाह की इबादत में जुट गए। तीन अशरों में बांटा गया रमजान

इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से मुकद्दस रमजान-उल-मुबारक नौवां महीना होता है। मुसलमानों के लिए यह विशेष महत्व रखता है। इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है, यानि कि दस-दस दिन का अशरा। इनमें पहला अशरा रहमत वाला, दूसरा अशरा मगफिरत वाला और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से निजात दिलाने वाला है। हजरत पैगंबर मोहम्मद साहब ने रमजान को अल्लाह का महीना बताया है। रोजा सब्र का इम्तिहान

रमजान में सहरी और इफ्तार की भी विशेषताएं हैं। रोजा रखने के लिए सुबह सवेरे जागते हैं। नमाज पढ़ते हैं और सहरी खाते हैं। इसके बाद से ही रोजे की हालत में सूर्यास्त तक भूख-प्यास पर काबू कर रोजा रखते हैं। भूलवश खाने-पीने से रोजा नहीं टूटता। मगरिब की अजान होने या फिर इफ्तारी का ऐलान होने पर खजूर आदि से रोजा खोला जाता है।

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Posted By: Jagran