जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : जीडीए ने इंदिरापुरम का वेक्टर मैप बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कॉलोनी से जुड़े संपत्ति, अभियंत्रण, प्रवर्तन, नियोजन और अन्य अनुभागों के दस्तावेज स्कैन कराए जा रहे हैं। उनकी लिस्टिग की जा रही है। वेक्टर मैप तैयार होने के बाद इंदिरापुरम के प्रत्येक फ्लैट, भवन और प्लॉट का ब्योरा ऑनलाइन हो जाएगा। एक क्लिक पर कोई भी ब्योरा देख सकेगा। जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने बताया कि पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में इंदिरापुरम को लिया गया है। इस काम में बेंगलुरु विकास प्राधिकरण मदद कर रहा है। इसके पूरा होते ही मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना का वेक्टर मैप बनवाया जाएगा। इसके बाद पूरे प्राधिकरण क्षेत्र का मैप तैयार होगा।

इंदिरापुरम का क्षेत्रफल 1222 एकड़ हैं। 1990 में जीडीए ने एकल यूनिट के लिए इसका लेआउट तैयार किया था। दिल्ली के नजदीक और एनएच-नौ से सटा होने के कारण लोगों ने इंदिरापुरम को वरीयता दी। यहां आबादी बढ़ती गई। लोगों की जरूरत हो देखते हुए बहुमंजिला इमारतें बनाने की इजाजत दे दी गई। इस वक्त यहां की आबादी डेढ़ लाख से ज्यादा है। जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने बताया कि इस कॉलोनी का लेआउट मैप प्राधिकरण के पास था। उसमें प्रत्येक प्लॉट का ब्योरा है। उस मैप को वेक्टराइजेशन के लिए बेंगलुरु विकास प्राधिकरण की टीम को दे दिया गया है। वह वेक्टर मैप पर प्रत्येक प्लॉट और भवन की डिजिटल बाउंड्री अंकित करेंगे। उसके बाद प्रत्येक प्लॉट से जुड़ा ब्योरा फीड किया जाएगा। बाद में उसे ऑनलाइन कर दिया जाएगा। लोग एक क्लिक पर भवन और प्लॉट की जानकारी देख सकेंगे। जीडीए के बकाए के बारे में जान सकेंगे। वीसी का कहना है कि दो महीने में यह काम हो जाएगा। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण के लिए भविष्य की संभावना मधुबन-बापूधाम में है। ऐसे में अगला वेक्टर मैप यहां का तैयार कराया जाएगा। उसके बाद पूरे शहर का वेक्टर मैप बनेगा। इस काम में नौ से दस महीने लग जाएंगे।

ई-ऑफिस तैयार करने में मिलेगी मदद

इससे जीडीए का ई-ऑफिस तैयार करने में मदद मिलेगी। पूरे शहर के विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं को नक्शे पर अंकित किया जाएगा। इस योजना के तहत सीवर लाइन, पेयजल लाइन, सड़क, नाले, फ्लाईओवर, ग्रेड सेपरेटर और बिजली लाइनों की डिटेल अलग-अलग नक्शे पर अंकित की जाएगी। विकास कार्यों की स्थिति को अंकित किया जाएगा। पूर्ण हो चुके विकास कार्यों को लागत और तारीख समेत अंकित किया जाएगा। ताकि, एक नजर में विकास की तस्वीर को देखा जा सके। भविष्य में योजनाओं का खाका खींचने में भी मदद मिलेगी। परियोजनाओं के दोहराव से बचा जा सकेगा। ध्वस्तीकरण व सीलिग के लिए चिह्नित अवैध इमारतों को गूगल मैप पर जियो टैग किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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