दीपा शर्मा, गाजियाबाद : इतनी बड़ी संख्या में हर रोज लोग कोरोना को मात दे रहे हैं। इसके बावजूद भी प्लाज्मा के लिए मरीजों के तीमारदारों के लिए भटकना पड़ रहा है। असल में लोग प्लाज्मा डोनेट करने के लिए जागरूक नहीं है। उन्हें लगता है कि प्लाज्मा डोनेट करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है या अन्य कारणों से वह प्लाज्मा डोनेट करना नहीं चाहते। जबकि प्लाज्मा डोनेट करने से किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं है। यह कहना है सिद्धार्थ विहार की गंगा यमुना हिडन अपार्टमेंट सोसायटी में रहने वाले अभिषेक सिंह का जो प्लाज्मा डोनेट कर वरिष्ठ नागरिकों की जान बचाने में मदद कर चुके हैं।

अभिषेक सिंह ने बताया कि वह कोरोना की पहली लहर में अगस्त 2020 में कोरोना संक्रमित हुए थे। सितंबर में उनके आफिस के साथी की मां को कोरोना हुआ था और उनकी स्थिति काफी गंभीर थी। उन्हें देने के लिए पहली बार उन्होंने प्लाज्मा डोनेट किया। अभिषेक सिंह ने बताया कि प्लाज्मा डोनेट करने के बाद उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई बल्कि मन को बहुत अच्छा लगा। इसके बाद नवंबर में अपने आफिस के ही दूसरे साथी के पिता कोरोना संक्रमित हुए और उन्हें प्लाज्मा की जरूरत पड़ी। जिसपर दोबारा से प्लाज्मा डोनेट किया। नवंबर में ही वाट्सएप पर चल रहे एक मैसेज को देखकर उन्होंने मदद करने का फैसला लेते हुए वरिष्ठ नागरिक को अपना प्लाज्मा डोनेट किया। चौथी बार नवंबर में भी उन्होंने वाट्सएप पर चल रहे मैसेज पर ही एक अनजान वरिष्ठ नागरिक को अपना प्लाज्मा डोनेट किया।

---

संक्रमित पत्नी ठीक होने के बाद करेंगी प्लाज्मा डोनेट

अभिषेक सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी कीर्ति सिंह और बेटा अयांश सिंह कोरोना संक्रमित हो गए थे। फिलहाल वे बिल्कुल ठीक हैं, लेकिन अभी कोरोना जांच रिपोर्ट का इंतजार है। उनकी पत्नी का घर पर ही चिकित्सक की सलाह पर उपचार चल रहा है। पत्नी कीर्ति सिंह ने भी निर्णय लिया है कि वह जैसे ही ठीक हो जाएंगी तो चिकित्सक जब भी उन्हें प्लाज्मा डोनेट करने के लिए परामर्श देंगे तो वह अपना प्लाज्मा डोनेट करेंगी। अभिषेक सिंह का कहना है कि उन्होंने चार बार प्लाज्मा डोनेट किया, लेकिन किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। न ही उन्हें कमजोरी महसूस हुई है। दूसरे लोगों से भी अपील की है कि सभी प्लाज्मा डोनेट कर दूसरों को जीवन दान देने में मदद करें।

Edited By: Jagran