बधाई देने के बजाय कोस रहे अगर आपकी सोसायटी की गलियों में लगी टाइल्स ठीक हो, इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी उन टाइल्स को निकालकर नई टाइल्स लगा दें तो आप बधाई देंगे। इसके विपरीत विवेकानंद नगर के लोग नगर निगम के अधिकारियों को बधाई देने के बजाय कोस रहे हैं। इसकी वजह नई टाइल्स लगाने के बाद सड़क का लेवल कहीं ऊंचा, तो कहीं नीचा कर देना है। इस कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर पहले पता होता कि इस तरह से काम किया जाएगा तो पुरानी टाइल्स को उखाड़कर ही न ले जाने देते। हल्की बारिश में ही घर के सामने जलभराव हो जाता है। अब सड़क का लेवल ठीक करने की मांग नगर निगम के अधिकारियों से करते हैं तो वे इसे मान नही रहे हैं। ऐसे में बारिश के दिनों में लोगों का पूरा दिन घर की साफ सफाई में निकल जाता है।

आदेश के गुलाम हैं हम सड़क पर वाहन खड़ा करने के कारण जाम की स्थिति बनती है। शहर में पार्किंग कम होने के कारण वाहन चालक सड़क पर ही वाहन खड़ा करने के लिए मजबूर होते हैं। सड़क सुरक्षा सप्ताह शुरू हुआ तो यातायात पुलिस ने सीट बेल्ट, हेलमेट न पहनने वालों के साथ ही अब सड़क पर वाहन खड़ा करने वालों के खिलाफ भी सख्ती करनी शुरू कर दी है। मोबाइल पर वाहन के चालान होने का संदेश मिलने पर एक युवक को बुरा लगा तो वह आरडीसी में वाहनों का चालान कर रहे यातायात पुलिस के सिपाही के पास पहुंचा। विरोध जताते हुए उसने कहा कि आप ही बताएं आरडीसी आएं तो हम वाहनों को कहां खड़ा करें। इस पर यातायात पुलिसकर्मी ने कहा कि कहीं भी खड़ा करो, लेकिन सड़क पर नहीं, क्योंकि हम आदेश के गुलाम हैं। हमें आदेश है कि सड़क पर खड़े वाहनों के चालान करो, तो हम कर रहे हैं।

साल बदला, हाल नहीं बारिश हो और शहर में जलभराव न हो, यह भला कैसे हो सकता है। नगर निगम के अधिकारियों ने मानसून आने से पहले दावा किया था कि शहर में नालों व नालियों की सफाई की सफाई पिछले 20 साल में ऐसी नहीं हुई, जैसी इस बार की गई है। इसके लिए रैंप भी तोड़े और विरोध भी झेला है। इस बार मानसून आने पर जलभराव की समस्या नहीं होगी, लेकिन बारिश होते ही इन दावों पर पानी फिर गया। मुख्य मार्ग से लेकर सोसायटियों के अंदर की सड़कें पानी में डूबी नजर आई। गोविदपुरम में कार्यालय जाने के लिए घर से निकले लोग पैंट ऊपर कर हाथों में जूते लेकर सोसायटी से बाहर जाते दिखे। इनमें से एक ने पूछने पर कहा कि साल बदला है, हाल नहीं। पिछले पांच साल में ऐसा कभी नहीं हुआ जब बारिश हुई और जलभराव न हुआ हो। देखते हैं ऐसा कितने साल तक होगा।

महीने में चंद दिन होते हैं दर्शन मंडल आयुक्त सुरेंद्र सिंह के निर्देश पर सभी विभागों में वीडियो काल के माध्यम से अधिकारियों व कर्मचारियों की हाजिरी की जांच की गई। कई कर्मचारी ड्यूटी से गैरहाजिर मिले और उनकी उपस्थिति रजिस्टर में दर्शाई गई थी। इनमें कई कर्मचारी ऐसे थे, जो कार्यालय आए और कार्यालय के काम से ही बाहर गए थे, लेकिन जांच के दौरान गैरहाजिर मिले तो सवालों के घेरे में आ गए। अब इन कर्मचारियों में से एक का कहना है कि कई अधिकारी ऐसे हैं, जो ड्यूटी पर महीने में चंद दिन ही आते हैं। ऐसा लंबे समय से हो रहा है, लेकिन कोई उनसे पूछताछ तक नही करता है। जिस दिन कोई कार्यक्रम होता है या महत्वपूर्ण बैठक होती है, उस दिन ही विभाग के कर्मचारियों को उनके दर्शन होते हैं। मोहन नगर जोन में तो एक अधिकारी ऐसे हैं, जिनके कार्यालय में नदारद रहने से कर्मचारी परेशान हैं।

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