एशियाई पैरा गेम्स 2026: चिराग! काश... तुम भी होते, मेडल जीतकर समर्पित कर रहे साथी खिलाड़ी
एशियाई पैरा गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हत्या के बाद उनके साथी खिलाड़ी पदक ...और पढ़ें
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चिराग त्यागी। सौ. इंटरनेट मीडिया
HighLights
चिराग त्यागी ने एशियाई पैरा गेम्स के लिए क्वालीफाई किया था।
हत्या से पहले चिराग का पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया।
साथी खिलाड़ियों ने अपने पदक चिराग त्यागी को समर्पित किए।
शाहनवाज अली, गाजियाबाद। जापान के नागोया में एशियाई पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के पदक जीतने और तिरंगा ऊंचा करने के बीच एक नाम ऐसा है, जिसकी कमी हर खुशी के साथ महसूस हो रही है। वह नाम है चिराग त्यागी का।
एशियाई पैरा गेम्स के लिए क्वालीफाई करने के बाद चिराग भी देश के लिए पदक जीतने का सपना संजोए थे, लेकिन इससे पहले ही उनकी हत्या कर दी गई।
एशियाई पैरा गेम्स में जीत के बाद चिराग के साथी खिलाड़ी पोडियम पर पहुंच रहे हैं। परिवार के लिए यह उपलब्धि गर्व के साथ उस अधूरे सपने की टीस भी लेकर आई है, जिसे पूरा होते देखने का इंतजार था।
मोदीनगर के बसंतपुर सैंतली गांव के चिराग ने मई में बेंगलुरु में आयोजित आठवीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप में पुरुषों की टी-12 श्रेणी की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 1500 मीटर में रजत पदक जीता था।
इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने एशियाई पैरा गेम्स के लिए क्वालीफाई किया था। वह पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे थे।
परिवार को उम्मीद थी कि चिराग देश के लिए पदक जीतकर लौटेंगे, लेकिन 30 मई को उनकी हत्या कर दी गई और उनका यह सपना अधूरा रह गया।
साथी खिलाड़ी ने समर्पित किया पदक
चिराग की साथी खिलाड़ी सिमरन शर्मा और प्रीति पाल भी एशियाई पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। सिमरन ने महिलाओं की 100 और 200 मीटर टी-12 स्पर्धा में स्वर्ण पदक और प्रीति पाल ने 200 और 100 मीटर टी-35 स्पर्धा में रजत पदक हासिल किए। दोनों खिलाड़ी दिल्ली जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कोच गजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में चिराग के साथ अभ्यास करती थीं।
प्रीति पाल ने चिराग को छोटे भाई जैसा बताते हुए अपना दूसरा रजत पदक उन्हें समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यदि चिराग साथ होता, तो वह भी पदक जरूर जीत जाता।
बेटे के सपने को जी रहे माता-पिता
चिराग के पिता मनोज त्यागी और मां निशा त्यागी घर पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन देख रहे हैं। बेटे के साथ अभ्यास करने वाली सिमरन और प्रीति की सफलता उन्हें खुशी देती है, क्योंकि वे जानते हैं कि चिराग इन दोनों खिलाड़ियों से कितना प्रेरित था। चिराग बचपन से ही दौड़ने के शौकीन थे।
कमजोर दृष्टि के बावजूद उन्होंने मेहनत और अभ्यास से अपनी अलग पहचान बनाई। साथी खिलाड़ी उन्हें प्यार से ''तूफान'' कहते थे।
