संवाद सहयोगी, टूंडला,(फीरोजाबाद): हाईवे से तीन किलोमीटर दूर बसे गांव उलाऊ खेड़ा में समस्याओं का अंबार लगा है। यहां बच्चे जर्जर हो चुके भवन में पड़ते हैं, जिसमें शौचालय भी नहीं है। गांव की कई गलियां पक्की हैं, लेकिन सफाई न होने से जलभराव और गंदगी व्याप्त है। ग्रामीणों के लिए उपचार एवं पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए केवल हैंडपंप का सहारा है, उनमें से भी अधिकांश खराब पड़े हैं। गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण पानी के लिए परेशान होने लगे हैं।

ग्राम पंचायत उलाऊ खेड़ा की आबादी 6000 के करीब है। इसमें उलाऊ और खेड़ा दो गांव शामिल हैं। गांव में रहने वाले ज्यादातर परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक है। गांव की यह संपन्नता पक्के मकानों एवं उनकी रंगाई-पुताई से झलकती है, लेकिन गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां विकास की गति धीमी होने का सबूत देता है। जहां-तहां गंदगी के ढेर लगे हैं। ग्रामीण बताते हैं, सफाईकर्मी कभी गांव में आता ही नहीं। नालियां उफन रही हैं। उनका गंदा पानी गलियों में भरा रहता है।

गांव में कोई स्वास्थ्य उपकेंद्र न होने के कारण ग्रामीणों को टूंडला तक की दौड़ लगानी पड़ती है। यहां की प्रमुख समस्या पानी की है। जलापूर्ति के लिए पूरी पंचायत में 55 सरकारी हैंडपंप लगे हैं, लेकिन भूमिगत जलस्तर गिरने के कारण इनमें से अधिकांश खराब पड़े हैं। रीबोर होने के बाद भी वे ज्यादा दिन नहीं चल पाते। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी वाली ग्राम पंचायत में पानी की एक टंकी तो होनी ही चाहिए। दो प्राथमिक एवं दो उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की अनदेखी के कारण यहां भी बदइंतजामी ही है।

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प्राचीन है ज्वाला देवी का मंदिर

गांव में ज्वाला देवी का प्राचीन मंदिर है। इससे पूरे गांव की आस्था जुड़ी हुई है। होली के बाद पड़ने वाली अष्टमी को यहां मेला लगता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां मुरादें मांगने आते हैं। नवरात्रों में भी यहां काफी भीड़ जुटती है। बुजुर्ग ग्रामीणों ने बताया कि ज्वाला देवी का मंदिर अंग्रेजों के जमाने से भी पहले का है। इसमें देवी की अखंड ज्योति हमेशा जलती रहती है।

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स्कूलों में नहीं हैं शौचालय

गांव में संचालित चार में से दो स्कूलों की इमारत जर्जर हो चुकी है। स्कूल में शौचालय भी नहीं है। बच्चों को खुले में शौच करने जाना पड़ता है। यही वजह है कि स्कूलों में बच्चे काफी कम आते हैं। एक स्कूल को छोड़ बाकी तीन में प्रतिदिन 30-40 बच्चे ही आते हैं। यह हाल तब है जब पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है और स्कूलों में शौचालय बनवाने एवं उनमे टाइल्स लगवाने पर खासा जोर दिया जा रहा है।

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ये कहते हैं ग्रामीण

-गांव में माता का प्राचीन मंदिर है। वहां तक पहुंचने का रास्ता भी खराब है। जगह-जगह जलभराव की स्थिति रहती है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

महंत बाबा बाल गिरी महाराजफोटो-छह

-------गांव की अधिकांश सड़कें तो पक्की हैं, लेकिन जलनिकासी के लिए नाली का इंतजाम नहीं है, जिसके चलते गांव का गंदा पानी सड़कों पर भरा रहता है। सज्जन ¨सहफोटो-सात

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विद्यालय तक पहुंचने का मार्ग काफी खराब है। भवन भी जर्जर हो गया है। बच्चों की ¨जदगी पर हर समय खतरा मंडराता रहता है। अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।

ममतेश कुमार फोटो-आठ

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एक साल में जितना पैसा आया वह सब स्कूलों में टाइल्स लगाने में खर्च हो गया। गलियों का निर्माण नहीं हो सका है। हैंडपंप काम नहीं करते हैं। दोनों गांवों में पानी का संकट है। इसे दूर करने के लिए प्रशासन से टीटीएसपी लगवाने की मांग की है। इसी तरह गांव के बीच में स्थित तालाब को पक्का कराना भी जरूरी है। अन्यथा उस पर अवैध कब्जा हो सकता है।

विजय यादव उर्फ पप्पू, ग्राम प्रधान उलाऊ फोटो-नौ

Posted By: Jagran

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