टूंडला (फीरोजाबाद): पचोखरा क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर में एक दिवसीय सत्संग का आयोजन किया गया। विख्यात कथा वाचक अरविन्द महाराज ने कहा कि हर व्यक्ति दु:ख भोगता है या सुखी जीवन व्यतीत करना चाहता है। यह उसकी अपनी सोच पर निर्भर करता है। व्यक्ति का जैसा भाव होता है। वैसा ही उसका चिन्तन होता है । एक ही सीढ़ी से लोग ऊंचाई तय करते हैं तो कुछ ऊपर से नीचे आ जाते हैं। फर्क सिर्फ सोच का होता है वरना ऊपर और नीचे जाने की सीढ़ी तो एक ही है । उन्होंने कहा कि जन्म से पूर्व गर्भ मे शरीर धारण करने और मृत्यु के समय प्राण वायु से मुक्त होकर शरीर त्यागने का तरीका सबका एक जैसा ही होता है। परन्तु जीवन जीने का तरीका एक जैसा नही हो पाता है। माना जाता है कि संचित कर्म फल का भोग करने के लिये ही जन्म लेना पड़ता है। सबके संचित कर्म, फल, गुण, रूप, रंग व स्वभाव आदि से अलग-अलग हैं। इसलिये उनके भोग करने के तरीके भी अलग-अलग हैं। स्थूल से सूक्ष्म बनाने की क्रिया ही मृत्यु है। इस दौरान उन्होंने कैंसर से पीड़ित महेश उपाध्याय को ग्यारह हजार की आर्थिक मदद दी। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने सत्संग का लाभ लिया।

Posted By: Jagran

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