जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद: कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए घरों के आंगन में तैयार की जाने वाली पोषित वाटिकाएं जिम्मेवारी की लापरवाही का शिकार हो गईं। कुपोषण से भी बदतर हालत में पहुंच चुके सैकड़ों बच्चे अब भी उसी हाल में हैं। जिला कार्यक्रम विभाग द्वारा वाटिका बनाने के लिए लाभार्थियों की जो सूची जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को दी गई उसमें बड़ा फर्जीवाड़ा मिला है। सूची में दर्ज चार सौ से अधिक अतिकुपोषित बच्चे गांवों में मिले ही नहीं।

जिला कार्यक्रम विभाग द्वारा कोरोना काल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सर्वे कराया गया था। इसमें तीन हजार से अधिक अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए। शासन के निर्देश हैं कि इन बच्चों के लिए उनके घर या आसपास पड़ी जमीन पर पोषण वाटिकाएं बनवाई जाएं, जिनमें लौकी, तोरई, पालक, मूली, सहजन, टमाटर, गाजर जैसी सब्जियां उगाई जाएं। ताकि कुपोषित बच्चों के घर वाले सब्जियां बच्चों को खिला सकें।

मनरेगा योजना से वाटिका बनाने की जिम्मेदारी जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) को सौंपी गई। अभिकरण ने कार्यक्रम विभाग से मिली अतिकुपोषित बच्चों के परिवार को सत्यापन कराया तो उसमें सैकड़ों बच्चे गांवों में मिले ही नहीं, जिसके कारण वाटिकाएं बनना शुरू ही नहीं हो सकी हैं। वहीं कई परिवार ऐसे मिले हैं, जिनके पास वाटिका बनवाने के लिए जगह नहीं है। मुख्य सेविकाओं को दिए नोटिस:

लाभार्थियों की सूची में फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी कृष्णपाल सिंह ने एका, जसराना और अरांव की मुख्य सेविकाओं को नोटिस दिए हैं। कार्यक्रम विभाग द्वारा दी गई सूची में कई कमियां हैं। उसमें सुधार कराया जा रहा है। पोषण वाटिकाओं पर काम जल्द ही शुरू होगा।

-देवेंद्र प्रताप सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए एक नजर

3057: अति कुपोषित जीरो से छह साल के बच्चे है जिले में

20,000: जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या है जिले में

01: जिले में अति कुपोषित बच्चों के लिए है पोषण पुनर्वास केंद्र

11: बाल विकास परियोजना है जिले में 2540: आंगनबाड़ी केंद्र हैं जिले में

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