फीरोजाबाद, कार्तिकेय नाथ द्विवेदी। चौकीदार को लेकर सियासी जंग भले ही छिड़ी हो, मगर गांव के चौकीदार पर कोई बात नहीं होती। ये चौकीदार निगरानी करता है, पुलिस बुलाता है और कभी-कभी मुकदमा भी लिखाता है और अदालत के चक्कर काटता है। पाता है तो सिर्फ 50 रुपये रोज।

सियासत में 'चौकीदार' शब्द अब गरमाया हुआ है। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, 'चौकीदार' को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। मगर, गांव के चौकीदार पर कोई बात नहीं होती। पुलिस व्यवस्था के मुताबिक, गांव-गांव की निगरानी के लिए चौकीदार है। यह गांव का ही रहने वाला शख्स होता है, जो पुलिस के सहयोगी की तरह काम करता है। महकमे की तरफ से लाल टोपी, बेल्ट और डंडा, सीटी भी मिलती है। इसके साथ ही मानदेय की व्यवस्था थी।

पांच साल पहले 1500 रुपये महीने मानदेय मिलना शुरू हुआ है। अब तक महंगाई बढ़ी, मगर इस चौकीदार के मानदेय में एक रुपया भी नहीं बढ़ा।

सुविधाओं की असलियत पर कुछ चौकीदारों ने बताया कि पुलिस विभाग से उन्हें न तो सीटी मिलती है न ही डंडे। बेल्ट भी नहीं मिलती। सिर्फ साफा बांधने को हर साल दो मीटर लाल कपड़ा और एक जोड़ी वर्दी मिलती है। हर महीने चार दिन उन्हें थाने पर बुलाकर कस्बों में गश्त कराई जाती है। थाने-चौकियों से अब तो साइकिल भी नहीं मिलती। मिलती है धमकी, शिकायत नहीं कर पाते: कुछ चौकीदारों ने बताया कि कई बार वारदातों की सूचना देने पर उन्हें धमकियां भी मिलती हैं, लेकिन वे पुलिस से शिकायत नहीं कर पाते। पुलिस कहेगी कि चौकीदार होकर डरते हो।

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569 ग्राम पंचायतों में 910 चौकीदार

जनपद की 569 ग्राम पंचायतों में करीब 910 चौकीदार हैं। ग्राम पंचायत में चौकीदार के आवेदन मांगे जाते हैं। थाना पुलिस से रिपोर्ट के बाद डीएम की कमेटी नियुक्त करती है।

Posted By: Jagran

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