जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद: महिला अधिवक्ता कानून से खिलवाड़ करती रही और मेरा परिवार फंसता रहा। मेरे पूरे परिवार पर छेड़छाड़ एवं मारपीट के कई झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। हम गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई ही नहीं की। इसी तरह के उत्पीड़न से तंग होकर मेरी बेटी ने आत्महत्या कर ली, लेकिन अब तक पुलिस फरार आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

सोमवार को पत्रकारों से वार्ता में आकांक्षा के पिता अनंत अग्रवाल ने बताया भाई की पत्नी संगीता ने उत्पीड़न की शुरूआत 22 साल पूर्व दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराकर की। वर्ष 2007 में पिता की तबियत खराब होने के बाद हदें पार कर दी। वह पिता को अपने साथ ले जाना चाहती थी। आरोप लगाया कि पिता के अंगों को बेचकर साढ़े तीन करोड़ कमाना चाहती थी। मना करने के बाद उसने झूठे मुकदमे दर्ज कराना शुरू कर दिया। निर्भया कांड के बाद कानून सख्त होने की आड़ में तो उसने कानून का सहारा लेकर मेरे पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया। हमने मारपीट में दो मुकदमे संगीता के खिलाफ दर्ज कराए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अपनी अधिवक्ता चाची की ज्यादती के चलते मेरी बेटी आकांक्षा ने शनिवार को आत्महत्या कर ली। उन्होंने एसएसपी से मांग की है कि हमारे खिलाफ दर्ज सभी मामलों की पुन: विवेचना कराते हुए सच्चाई पता कर परिवार को न्याय दिलाया जाए। वही आरोपी संगीता के बेटे चैतन्य भी आकांक्षा को न्याय दिलाने को उनके परिवार के साथ आ गए। उनका कहना था कि मां को कई बार समझाया, लेकिन वह नहीं मानी। मेरी भी कई बार वह पिटाई कर चुकी हैं। इस मौके पर उल्लास गर्ग, प्रतीक गर्ग, चैतन्य अग्रवाल आदि मौजूद रहे। मंगलवार शाम छह बजे भारत विकास परिषद तरूण शाखा द्वारा घंटाघर से सुभाष तिराहे तक कैंडल मार्च निकाला जाएगा।

Posted By: Jagran

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