जागरण संवाददाता,फिरोजाबाद: भाजपा से इस्तीफा देकर सपा में आए विधायक डा. मुकेश वर्मा का नुकसान सपा को 48 घंटे में ही उठाना पड़ गया। सपा की टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे पूर्व विधायक ओमप्रकाश वर्मा ने रविवार को भाजपा का दामन थाम लिया। उन्होंने लखनऊ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के समक्ष पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

जिले के पूर्व मंत्री और निषाद समाज के कद्दावर नेता रहे रघुवर दयाल वर्मा के पौत्र ओमप्रकाश वर्मा 2012 में शिकोहाबाद से सपा के टिकट पर विधायक बने थे। 2017 में सैफई परिवार की कलह में उनका टिकट कट गया था। इस बार वे सपा के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। तीन दिन पूर्व बदले सियासी घटनाक्रम में भाजपा विधायक डा. मुकेश वर्मा ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ जाने का एलान कर भाजपा से इस्तीफा दे दिया और सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। शनिवार रात वर्मा का सपा से टिकट फाइनल होने की खबर आई, तो ओमप्रकाश वर्मा ने आनन-फानन में सिरसागंज के बर्खास्त सपा विधायक हरिओम यादव से संपर्क किया। हरिओम यादव ने पार्टी नेतृत्व से वार्ता कराई और दोनों रात में ही लखनऊ रवाना हो गए।

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मुझे धोखे में रखती रही सपा: वर्मा

भाजपा में शामिल होने के बाद पूर्व विधायक ओम प्रकाश वर्मा ने जागरण को फोन पर बताया कि सपा ने उनके साथ विश्वासघात किया। पांच साल पार्टी के जिन नेताओं ने संघर्ष किया, मुकदमे झेले, उन्हें छोड़कर पार्टी ऐसे लोगों को टिकट दे रही है जिन्होंने जनता को लूटने के अलावा और कुछ नहीं किया। उन्होंने शिकोहाबाद के मौजूदा विधायक पर जमीनों पर कब्जा करने और जनता से धोखा करने का आरोप लगाया। वर्मा का कहना था कि पूर्व सांसद अक्षय यादव शनिवार को पांचों विधानसभा सीटो के गुपचुप तरीके से बीफार्म ले आए। वर्मा का दावा है कि उनकी घर वापसी हुई है। अब वह भाजपा के टिकट पर शिकोहाबाद से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा गठबंधन से जीतकर वनमंत्री बने थे बाबा, पौत्र शुरू करेंगे पारी.

प्रदेश के पूर्व वन मंत्री रहे रघुवर दयाल वर्मा ने 1996 का चुनाव भाजपा-समता गठबंधन में फिरोजाबाद सीट से जीता था। इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए और वन मंत्री बने। चार बार के विधायक रहे रघुवर दयाल वर्मा बाद में सपा में चले गए। उनके निधन के बाद सपा ने 2012 में पौत्र ओमप्रकाश वर्मा को शिकोहाबाद से टिकट दिया।

Edited By: Jagran