UP में रोडवेज बसों पर बंपर चालान, एक पर रिकॉर्ड 200; फिर भी सड़कों फर्राटा भर रहीं
फिरोजाबाद और शिकोहाबाद में रोडवेज बसें यातायात नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, जिससे उन पर भारी संख्या में चालान ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। जैन मंदिर हो या फिर शिकोहाबाद का एटा चौराहा दोनों ही स्थानों पर यातायात व्यवस्था को बिगाड़ने में रोडवेज बसों की अहम भूमिका है। ऐसी स्थिति में यातायात पुलिस द्वारा उनके चालान भी किए जा रहे हैं। फिर भी मनमानी कम नहीं हुई। दैनिक जागरण ने मंगलवार दोपहर 12 बजे बसों के हुए चालानों की पड़ताल की, तो एक बस पर चालानों की 50 से लेकर 200 तक मिली।
फिर भी चालक बसों को दौड़ा रहे थे। जबकि परिवहन विभाग का नियम है कि तीन से अधिक बार चालान होने पर चालक का ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) तीन माह के लिए निलंबित किया जाता है, लेकिन इन रोडवेज बस चालकों पर कार्रवाई अब तक नहीं की गई।
रोडवेज बसें स्टैंड पर क्यों नहीं आतीं? इस सवाल पर परिवहन निगम के अधिकारियों और बस चालकों के दावे आमने-सामने हैं। अधिकारी कहते हैं कि चालक अपनी मर्जी से बसों को डिपो में नहीं लाते, जबकि चालकों का कहना है कि उन्हें चौराहों से ही सवारी भरने के निर्देश दिए जाते हैं।
इस खींचतान के बीच बसों के आनलाइन चालान का रिकार्ड व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जागरण की टीम ने शनिवार दोपहर बस स्टैंड और जैन मंदिर पर बसों के नंबर से उनके चालानों की संख्या चेक की, तो यह संख्या 50 से लेकर 199 पाई गई। इतने चालान होने के बाद भी चालक बेधड़क बसों को दौड़ा रहे थे।
किस बस पर कितने चालान
सोमवार को शिकोहाबाद डिपो की बस संख्या यूपी78एचटी9850 पर 49, औरैया डिपो की बस संख्या यूपी78एचटी3816 पर 94, इटावा डिपो की बस संख्या यूपी78एचटी6742 पर 45, औरैया डिपो की बस संख्या यूपी78एचटी7611 पर 106, इटावा डिपो की बस संख्या यूपी78एचटी2591 पर तीन और मथुरा डिपो की अनुबंधित बस संख्या यूपी85एटी6019 पर 199 चालान मिले।
सभी बसों के चालानों की स्थिति लंबित थी। चालकों ने इसका कारण बताया कि 12 से 14 हजार के वेतन में कैसे चालानों का भुगतान किया जाए। अधिकारी भुगतान की जिम्मेदारी उनके ऊपर डाल देते हैं।
यह है नियम
नियम है कि एक वर्ष के अंदर यदि किसी भी वाहन का तीन से अधिक बार चालान कटता है, या फिर लगातार परमिट नियम या ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करते हुए वाहन चालक पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम की धारा 86 के तहत परमिट निलंबित या निरस्त करने का प्रावधान है। साथ ही धारा 207 के तहत वाहन सीज करने प्रावधान है।
