फिरोजाबाद घंटाघर निर्माण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक: नगर निगम की योजना को झटका
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद में एफिल टावर की तर्ज पर बनने वाले घंटाघर के निर्माण पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

फिरोजाबाद का घंटाघर।
HighLights
कोर्ट ने निर्माण को तर्कहीन और मनमाना बताया।
रेस्टोरेंट संचालक की याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। पुराने और जर्जर हो चुके घंटाघर को एफिल टावर की तर्ज पर फिर से बनाने के नगर निगम के प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है। रेस्टोरेंट संचालक की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसके निर्माण पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए है कि अब हर किसी के पास मोबाइल फोन और घड़ी है। ऐसे में घंटाघर बनवाना तर्कहीन और मनमाना रवैया है। सदर बाजार के बीचोंबीच 55 वर्ष पुराना घंटाघर शहर की पहचान था।
देशभर से आने वाले चूड़ी के छोटे-बड़े व्यापारियों को भी पता था कि फिरोजाबाद में घंटाघर के पास ही देश का सबसे बड़ा चूड़ी बाजार लगता है। देखरेख के अभाव में इसमें लगी विशाल घड़ी की सुइयां दो दशक पहले ही थम गईं थीं। बाद में इसका मलबा भी गिरने लगा तो इसके पुनर्निर्माण की मांग शुरू हुई।
पूर्व क्षेत्रीय पार्षद मोहित अग्रवाल की पहल पर नगर निगम के पहले बोर्ड में इसे फिर से बनाने का प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन कई कारणों से बात आगे नहीं बढ़ी। वर्तमान पार्षद आशीष दिवाकर सहित अन्य पार्षदों द्वारा फिर से मुद्दा उठाने के बाद निर्माण विभाग ने पांच माह पूर्व इसके नवनिर्माण के लिए 1.27 करोड़ से बजट पास कराया है।
पूर्व नगर आयुक्त ऋषि राज ने इसके लिए एफिल टावर की तरह डिजाइन तैयारी थी। ई-टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मई में पूर्व पुराने घंटाघर का ध्वस्तीकरण करा दिया गया। बिजली के तारों को भूमिगत करने के लिए विभाग को भी 72 लाख का बजट भी दे दिया है।
दूसरी ओर घंटाघर के निकट रेस्टोरेंट चलाने वाले गौरव गोयल ने निर्माण के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। 15 सितंबर को न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए 30 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक निर्माण पर रोक लगा दी है।
खंडपीठ ने इसे मनमाना और अव्यवहारिक निर्णय बताया है। कहा है कि जहां घंटाघर बन रहा है। वहां व्यस्त बाजार है। इसके बनने से याची का कारोबार बर्बाद हो जाएगा। नगर आयुक्त प्रशांत नागर का कहना है कि अगली सुनवाई पर निगम का पक्ष प्रभावी तरीके से रखा जाएगा।
याची ने कोर्ट को बताया कि 55 वर्ष बाद निर्माण कराया जा रहा है। जबकि घंटाघर पहले से बना हुआ है। हम उसका पुनर्निर्माण करा रहे हैं।
