जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद: गांवों में भुखमरी और कुपोषण की वजह से होने वाली घटनाओं को लेकर सरकार गंभीर हो गई है। इनकी रोकथाम के लिए विस्तृत योजना बनाई है। गरीबी और भोजन की कमी से होने वाली घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी शासन ने प्रधानों को दे दी है। अब यदि कोई किसान आत्महत्या करेगा तो संबंधित ग्राम प्रधान पर कार्रवाई की जाएगी। खंड विकास अधिकारी एवं डीएम पर भी प्रशासनिक कार्रवाई होगी।

गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी या कर्ज से तंग किसान आत्महत्या कर रहे हैं। प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। शासन का मानना है कि इन घटनाओं को रोकने में प्रधान अहम भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानों के पास आकस्मिक खर्चे के लिए वित्तीय अधिकार होते हैं। पहले केवल एक हजार रुपये तक ही खर्च करने का अधिकार था, शासन ने अब इसे बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया है। प्रधान इसे भुखमरी और कुपोषण से पीड़ित व्यक्ति या परिवार पर खर्च कर सकते हैं। निदेशक पंचायत राज आकाशदीप ने इस संबंध में सभी प्रधानों को निर्देश दिए हैं वह पंचायत में रहने वाले अत्यंत गरीब परिवारों की सूची तैयार करा अपने पास रखें। ऐसे परिवारों का समय-समय पर फॉलोअप करें। जिन परिवारों को जरूरत हो उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करें। बाद में इस धनराशि की प्रतिपूर्ति राजस्व विभाग द्वारा की जाएगी। मिशन निदेशक ने चेतावनी दी है कि यदि किसी गांव में भुखमरी या कुपोषण के कारण कोई घटना होगी तो प्रधान और पंचायत सचिव सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। इन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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