जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद: श्रीराम कॉलोनी वासियों के लिए मंगलवार की सुबह नई उम्मीद लेकर आई। सुबह लोगों की नींद खुली तो उनकी आंखों में नई चमक थी, क्योंकि सालों बाद वनवास जो खत्म हुआ था। कॉलोनी में चारों ओर खुशी का माहौल था। हर किसी के चेहरे पर विकास की उम्मीद नजर आ रही थी।

कोटला रोड स्थित श्रीराम कॉलोनी की जनता 11 साल से वनवास काट रही थी। कॉलोनी को नगर निगम सीमा में शामिल कराने के लिए लोगों ने दो साल में कई बार आंदोलन किए। सितंबर माह में तमाम महिला-पुरुषों ने पेयजल टंकी पर चढ़कर लगातार आठ घंटे तक आंदोलन किया। मेयर नूतन राठौर, नगर आयुक्त विजय कुमार ने मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि कॉलोनी को नगर निगम सीमा में शामिल कराने के लिए बोर्ड से जल्द प्रस्ताव भेजेंगे। शासन में भी लगातार पैरवी की जाएगी। इधर सदर विधायक मनीष असीजा ने विधानसभा में यह मुद्दा प्रमुखता से रखा। कॉलोनी वासियों को लंबी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। शासन ने श्रीराम कॉलोनी को नगर निगम में शामिल करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। केबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों ने आतिशबाजी चलाकर, एकदूसरे को मिठाई खिलाकर व रात में दीप मालिका सजाकर जीत का जश्न मनाया। मंगलवार को सुबह से लोगों के चेहरे खिले नजर आए।

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पीएम आवास के 116 लोगों ने भरे फार्म

सदर विधायक मनीष असीजा मंगलवार को क्षेत्रीय लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने पीएम शहरी आवास योजना के फार्म भरवाने के लिए कैंप लगवाया। कैंप में पीएम आवास के फार्म भरने के लिए क्षेत्रीय लोगों की भीड़ लगी रही। कैंप में 116 लोगों के फार्म भरवाए गए। इधर नगर निगम प्रशासन ने भी क्षेत्र के विकास कार्य कराने की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। नगर निगम सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए जल्द प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

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- श्रीराम कॉलोनी को नगर निगम में शामिल कराने को हम सालों से लड़ाई लड़ रहे थे। हर बार हमें झूठे आश्वासन दे दिए जाते थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। हम दैनिक जागरण का आभार जताते हैं कि उनके प्रयास के चलते हमारी आवाज शासन तक पहुंच सकी। - देवकी - नगर निगम में शामिल न होने के कारण 15 साल से कच्ची गलियों में रहने को मजबूर हैं। जन्म, मृत्यु, आय, निवास प्रमाण पत्र भी नहीं बन पा रहे थे। हमारी समस्या को जागरण ने प्रमुखता से उठाया, तब जाकर हमें न्याय मिल सका है। - जयमाला - नगर निगम व नगर पंचायत में शामिल न होने के कारण पूरा क्षेत्र विकास से अधूरा था। कोई अधिकारी हमारी बात भी सुनने को तैयार नहीं था। हर जगह से हमें दुत्कार कर भगा दिया था। अब हमारी कॉलोनी में भी जल्द विकास कार्य शुरू होंगे। - ऊषा देवी - नगर निगम के अधिकारी की मनमानी के कारण हम 11 साल से वनवास काट रहे थे। हर जगह से निराश होने पर इच्छा मृत्यु के लिए भी आंदोलन किया। हम दैनिक जागरण का आभार करते हैं, उनके प्रयास से हमारी निगम में शामिल हो सकी है। - भूरी देवी

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Posted By: Jagran

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